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Bhojpuri cinema actress Kajal Raghavani's biography & Hot HD Photos, Movies

अभिनेत्री Kajal Raghavani Hot HD Photos, Movies

Kajal Raghwani and Khesari Lal Romance scene
काजल राघवानी एक भारतीय भोजपुरी सिनेमा अभिनेत्री हैं। भोजपुरी फिल्म रिहाई से डेब्यू की, वह अब भोजपुरी इंडस्ट्री की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में से एक हैं। हर भोजपुरी दर्शक काजल की फैन ही नहीं क्यूटनेस की वजह से भी उनकी काबिलियत है।

काजल राघवानी प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि

Kajal Raghwani and Khesari Lal Romance scene

काजल राघवानी की जन्मतिथि 20 जुलाई, 1990 है। उनका जन्म तेघरा, बिहार में हुआ था। तेघरा में प्रारंभिक शिक्षा के बाद, उन्होंने पटना विश्वविद्यालय, पटना से अपनी डिग्री पूरी की। बचपन से, वह एक अभिनेत्री बनना चाहती थी और इसके लिए वह कोशिश कर रही थी।

भोजपुरी इंडस्ट्री में काजल राघवानी

Kajal Raghwani and Khesari Lal Romance scene

कई कोशिशों के बाद, काजल राघवानी को 2013 में एक भोजपुरी फिल्म रिहाई में मौका मिला। इसके बाद, उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और आज तक कई फिल्में की हैं और लगभग सभी भोजपुरी सितारों के साथ काम किया है। ज्यादातर फिल्मों में काजल ने प्रसिद्ध गायक सह अभिनेता पवन सिंह के साथ काम किया। लोग काजल राघवानी और विराज भट्ट की जोड़ी को भी पसंद कर रहे हैं। काजल बहुत छोटी है और उसके पास बहुत लंबा रास्ता है। केवल 3 साल के बहुत कम समय में उन्होंने कई फिल्में की हैं। 
आइए नजर डालते हैं काजल
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राघवानी की फिल्मों पर।
काजल राघवानी की सबसे सफल फिल्म पटना से पाकिस्तान है जिसमें उन्होंने निरहुआ यानि दिनेश लाल यादव और आम्रपाली दुबे के साथ काम किया। गीत हम हैं पिया जी के पातड़ तिरियावा भोजपुरी जगत के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले गीतों में से एक है। फिल्म भोजपुरिया राजा में उनके काम को भी काफी सराहा गया है।

Kajal Raghwani and Khesari Lal Romance scene
भोजपुरी इंडस्ट्री में Kajal Raghwani का डेब्यू 2011 में भोजपुरी फिल्म सुगना में हुआ था। उन्होंने भोजपुरी इंडस्ट्री के सभी बड़े अभिनेताओं के साथ काम किया है। उन्होंने आशिक आवारा और पटना से पाकिस्तान में Dinesh Lal Yadav के साथ काम किया; फ़िल्मों में पवन सिंह के साथ हुकुमत और भोजपुरिया राजा; मेहंदी लगा के रखना में खेसारी लाल यादव के साथ, मै सेहरा बांध के आउंगा और दुल्हन गंगा पार के और बैरी कंगना 2 में
रवि किशन के साथ किया था ।
Kajal Raghwani and Khesari Lal Romance scene

खेसारी लाल यादव की बहुप्रतीष्ठित भोजपुरी फिल्म "बाघी एक योधा" ’का ट्रेलर लॉन्च हो गया है और यह Khesari Lal और Kajal Raghwani राघवानी के बीच कुछ भावपूर्ण रोमांटिक दृश्यों के साथ युग्मित कुछ लुभावने एक्शन दृश्यों के
साथ बना है। जिसमें Khesari Lal सेना की वर्दी में नजर आए थे जबकि काजल एक हेडस्कार्फ़ के साथ देखी गई थीं।
Kajal Raghwani and Khesari Lal Romance scene
 खेसारी और काजल के अलावा फिल्म में ऋतु सिंह, प्रकाश जयेश और माया यादव भी प्रमुख भूमिकाओं में हैं। शेखर शर्मा द्वारा निर्देशित और जयंत घोष द्वारा निर्मित, फिल्म में मधुकर आनंद द्वारा संगीतबद्ध किया गया है और गीत प्यारेलाल, आज़ाद सिंह और श्याम देहाती द्वारा लिखे गए हैं।
Kajal Raghwani and Khesari Lal Romance scene

यह फिल्म गायक-अभिनेता Khesari Lal और Kajal Raghwani के बीच एक और सहयोग को चिह्नित करेगी, जिन्होंने पिछली बार 'कुली नंबर 1', 'दबंग सरकार', 'संघर्ष', 'दुल्हन गंगा पार', 'हम हैं हिंदुस्तानी' जैसी फिल्मों में एक साथ काम किया था। , 'मेहंदी लगा के रखना', 'बालम जी लव यू' और 'मैं सहारा बांध कर आऊंगा' जैसी फिल्मों में अच्छा काम किया है। 

Kajal Raghwani and Khesari Lal Romance scene

रितेश पांडे और काजल राघवानी अभिनीत बहुप्रतीक्षित फिल्म 'काशी विश्वनाथ' 21 जून को बड़े पर्दे पर हिट होने के लिए तैयार है।
Kajal Raghwani and Khesari Lal Romance scene
अभिनेता ने फिल्म को रिलीज की तारीख की घोषणा करने के लिए इंस्टाग्राम पर ले लिया। उन्होंने new काशी विश्वनाथ ’का नया पोस्टर साझा किया जहां वह दोहरी भूमिका में नजर आ रहे हैं। फिल्म में वह एक पुलिस वाले की भूमिका निभाते नजर आएंगे और एक ठग भी।
दूसरी तरफ, काजल गुलाबी रंग के सूट में पुलिस ऑफिस कैप के साथ पोज देती हुई नजर आ रही हैं।

Kajal Raghwani and Khesari Lal Romance scene
फिल्म का ट्रेलर पहले ही आउट हो चुका है और दर्शकों से शानदार प्रतिक्रिया मिली है। फिल्म की कहानी को एस.एस. रेड्डी द्वारा निर्मित जबकि सुब्बा राव गोसांगी ने लिखा और निर्देशित किया है।

'काशी विश्वनाथ' में अन्य भोजपुरी सितारों जैसे सारिका दोसर, निशा दुबे, संजय वर्मा, सकिला माजिद, उदय श्रीवास्तव, धर्मेंद्र धरम, सुप्रिया, मोहन शेट्टी, रतन निहथा, अजय यादव और नरेंद्र शर्मा भी हैं।

Kajal Raghwani and Khesari Lal Romance scene
आगामी भोजपुरी फिल्म 'भोजपुरिया राजा' का फर्स्ट लुक हाल ही में अनावरण किया गया था। इसमें सुपरस्टार पवन सिंह और हॉट काजल राघवानी शामिल हैं। इस फिल्म को एक आउट-एंड-
आउट मनोरंजन कहा जाता है जिसमें कई व्यावसायिक तत्व एक साथ मिश्रित होते हैं।
सुधीर सिंह द्वारा निर्मित, फिल्म सुजीत कुमार सिंह द्वारा अभिनीत है। पवन को फिल्म में कुछ मन बहलाने वाले स्टंट करने के लिए कहा जाता है। 'भोजपुरिया राजा' के प्रोमो और गानों को इंटरनेट पर अच्छी प्रतिक्रिया
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मिल रही है। ट्रेलर को अब तक 5 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है।
फिल्म में ब्रिजेश त्रिपाठी, उमेश सिंह, सनी सिंह, लोटा यादव और सीमा सिंह भी हैं। मधुकर आनंद ने फिल्म का संगीत तैयार किया है।

काजल राघवानी फिल्में
दिनेश लाल यादव और आम्रपाली दुबे के साथ आशिक आवारा
Kajal Raghwani and Khesari Lal Romance scene

पवन सिंह के साथ भोजपुरिया राजा
अरविंद अकेला यानी कल्लू के साथ हुकूमत
विराज भट्ट के साथ बैगी भीले सजना हमार
खेसारी लाल यादव के साथ इंटकम
विराज भट्ट के साथ लागी तोहसे लगन
दिनेश लाल यादव और आम्रपाली दुबे के साथ पटना सी पाकिस्तान
खेसारी लाल यादव के साथ चरन की सौगंध
Kajal Raghwani Hot HD Pics

खेसारी लाल यादव और विराज भट्ट के साथ जनमन
पवन सिंह, खेसारी लाल यादव और अक्षरा सिंह के साथ प्रतिज्ञा २
मंजू टाइगर के साथ मंजू मोतीवाला, कुणाल तिवारी
विराज भट्ट और मनोज टाइगर के साथ पंचायत
Kajal Raghwani and Khesari Lal Romance scene

खेसारी लाल यादव के साथ प्यार झुकता नहीं
जोगिंद्र त्रिपाठी के साथ सबा बडा मुजरिम
विराज भट्ट के साथ विराज तडिपार
आदित्य ओझा और संजय पांडे के साथ रिहाई

Mutual Fund Cut Off Timing Rules 2021

म्यूच्यूअल फंड कट ऑफ टाइमिंग नियम  2021

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने अपने परिपत्र SEBI/HO/IMD/DF2/CIR/P/2020/253 दिनांक 31 दिसंबर, 2020 को जारी कर कहा कि नया कट ऑफ़ टाइम 1 जनवरी 2021 लागू हो जायेगा।

17 सितंबर को, सेबी ने कहा था कि आपके म्यूचुअल फंड निवेश पर उसी दिन शुद्ध परिसंपत्ति मूल्य (NAV) लागू होगा, जब आपका पैसा उसी दिन फंड हाउस में पहुंच जायेगा । यह परिवर्तन पहले 1 जनवरी, 2021 से लागू होगा । हालांकि, एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) द्वारा उद्धृत परिचालन चुनौतियों के कारण इसे लागू कर दिया गया है।

NAV कट-ऑफ टाइमिंग अलग-अलग श्रेणियों के म्यूचुअल फंड के लिए अलग-अलग बनाये गए हैं ।

लिक्विड फंड के लिए :

यदि आपका ऑर्डर 12.55 बजे के पहले Submit होता है और आपकी ऑर्डर की राशि 2 लाख से कम है तो आपको Previaus Day का NAV मिलेगा।

डेट फंड्स और कंजर्वेटिव हाईबर्ड फंड्स के लिए :
यदि 2 लाख रुपये से कम राशि 3 बजे के पहले Submit होता है तो आपको Same Day की NAV मिलेगा। यदि आदेश 3.00 बजे के बाद Submit होता है तो आपको अगले दिन का NAV मिलेगा।

2 लाख रुपये से अधिक की राशि :

यदि आपका ऑर्डर दोपहर 2.25 बजे Submit होता है तो आपको आज का एनएवी मिलेगा। यदि आदेश 2:25 बजे के बाद Submit होता है, तो आपको अगले दिन का NAV मिलेगा।

इक्विटी फंड के लिए

यदि आपका ऑर्डर 3.00 बजे Submit होता है, तो आपको आज का NAV मिलेगा। यदि आदेश 3.00 बजे के बाद Submit होता है, तो आपको अगले दिन का NAV मिलेगा।

खरीद फरोख्त (Purchase) Scheme Type Cut-off Time
योजना का प्रकार बीएसई कट-ऑफ टाइम इस प्रकार है :-
लिक्विड 12:55 बजे
ऋण / हाइब्रिड कंजर्वेटिव - गैर लिक्विड> 2 लाख  2:25 बजे
अन्य - नॉन लिक्विड> 2 लाख  2:25 PM
ऋण / हाइब्रिड रूढ़िवादी-गैर लिक्विड <2 लाख 3:00 PM
अन्य। - नॉन लिक्विड <2 लाख 3:00 PM
2 लाख से अधिक बैलेंस के लिए :-
योजना का प्रकार इस प्रकार है बीएसई कट-ऑफ
 लिक्विड 3:00 बजे
गैर  लिक्विड - ऋण / हाइब्रिड कंजर्वेटिव 3:00 बजे
गैर  लिक्विड - अन्य 3:00 अपराह्न

म्यूचुअल फंड्स में कट-ऑफ टाइमिंग क्या है?

कई निवेशक ट्रेडिंग घंटे और कट-ऑफ टाइमिंग के बीच भ्रमित हो जाते हैं। जबकि ट्रेडिंग म्यूचुअल फंड यूनिट खरीदने या बेचने के लिए आवंटित अवधि निर्धारित हैं, कट-ऑफ टाइम नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) निर्धारित करते हैं, जिस पर आप म्यूचुअल फंड यूनिट खरीद या बेच सकते हैं। विभिन्न प्रकार के फंडों के लिए कट-ऑफ टाइम अलग-अलग हैं।

लिक्विड फंड को छोड़कर सभी फंडों के लिए, यदि आप कट-ऑफ टाइमिंग से पहले म्यूचुअल फंड में खरीदारी / निवेश करते हैं, तो आप उसी दिन का एनएवी प्राप्त कर सकते हैं।

सितंबर में, सेबी ने एक और खंड जोड़ा था। उसी दिन की NAV प्राप्त करने के लिए, आपका पैसा उसी दिन AMC तक भी पहुंच जाना चाहिए। यदि आपने कट-ऑफ टाइमिंग से पहले लेन-देन किया है और किसी कारण से पैसा फंड हाउस तक नहीं पहुंचा है, तो आपको अगले दिन का एनएवी मिल सकता है।

All countries need India's vaccine

All countries need India's vaccine

Under the Neighborhood First Policy, India is supplying the Corona vaccine to its neighbors and close countries. So far, the first consignment of the CoveShield vaccine has been sent to Bangladesh, Maldives, Bhutan and Nepal. So far 92 countries of the world have contacted India for the corona vaccine.

Sources in the government say that Prime Minister Narendra Modi has a clear message that the vaccine should be used for humanity. In such a situation, if Pakistan also asks for the vaccine, then India will have no problem. If the vaccine made in China does not work, India will not hesitate to supply it with a home-grown vaccine.

Kovishield approved in Pakistan

Pakistan's Imran government has given approval for emergency use of KoviShield vaccine a few days ago. Here the Chinese company Sinopharm vaccine has also been approved. Its one million dose has been ordered.

India gave 20 million vaccine doses to Bangladesh

India has sent 2 million doses of corona vaccine as a help to neighboring country Bangladesh. Indian High Commissioner Vikram Doraiswami on Thursday handed over the same to Dr. AK Abdul Momin, Foreign Minister of Bangladesh. Momin said that India has given these vaccines at a very important time, because the number of infected people in the country is increasing. So far, 5,29,687 cases have been reported in Bangladesh.

Momin said that India has stood with Bangladesh since the liberation war in 1971. Today, even when the epidemic is spreading in the world, India has brought the gift of vaccine. He called the initiative an evidence of true friendship between Bangladesh and India. Bangladesh is the fourth country to receive a vaccine from India.

Help three more neighbors

Nepal - 1 million doses
Bhutan - 1,50,000 doses
Maldives - 1,00,000 doses

India said - full attention is also given to the needs of the country
Vaccination has been done on a large scale since 16 January in India. Under this, two vaccines Kovishield and Kovaxin are being applied to healthworkers. On the supply of the vaccine to other countries, the Ministry of External Affairs said that it would be decided that the companies making the vaccine have sufficient stock to meet the domestic requirements while supplying them abroad.

Cases of side effects of Indian vaccine are less, hence demand more


Most countries are demanding Indian vaccines. According to sources, the reason is that after applying the vaccine made in India, there have been very few cases of side effects. In this connection, Prime Minister Roosevelt Skerrit of the Dominican Republic wrote a letter to Prime Minister Narendra Modi on Tuesday. He said that we need the CoveShield vaccine immediately. To keep the people of the country safe, I request you to help us. The Dominican Republic has a population of about 72 thousand. Roosevelt has demanded 70 thousand vaccines.

These countries tied up with the Serum Institute


Brazil, one of the countries most affected by Corona, has also sent a special aircraft to Pune to get the vaccine. It will send 20 lakh doses of vaccine. These have been purchased by the Focruz Biomedical Institute of the Brazilian Government.
Health Minister Eduardo Pazuelo of Sao Paulo said that all preparations have been made to take the vaccine of AstraZeneca-Oxford University, made at the Serum Institute of India.
Brazil's National Health Surveillance Agency Envisa has called a meeting for emergency approval to CoveShield on Sunday. China's vaccine has been approved in Brazil.
The Government of Bolivia has signed an agreement with the Serum Institute for the supply of 50 million doses of the Kovyshield vaccine. This country has reached an agreement to buy the same dose of Sputnik V vaccine of Russia.

Sharir Ko Khokhla Kar Deta Hai Swapnadosh

शरीर को खोखला कर देता है स्वप्नदोष 

दोस्तों ! स्वपनदोष एक ऐसी बीमारी है जो युवावस्था में शरीर को खोखला कर देता है। यहाँ तक की शरीर की हड्डियों तक को कमजोर बना देता है। अगर यह स्वपनदोष ज्यादा बढ़ जाये तो सैकड़ो बीमारियों का जन्मदाता भी बन जाता है। यह स्वपन दोष (Nightfall) मनोबल को हर लेता है। दिमाग को चिड़चिड़ा बना देता है। स्वपनदोष किसी भी काम में मन नहीं लगने देता है। थोड़ी सी मेहनत के बाद साँस फूलने लगता है थकान होने लगती है। यह स्वपन दोष की बीमारी परीक्षा में फेल होने का कारण भी बन जाता है। युवावस्था में कमजोरी और  सेहत न बनने का कारण है का मूल कारण है स्वपन दोष। 

क्यों होता है स्वपनदोष 

दोस्तों ! स्वपनदोष का मूल कारण है हस्तमैथुन यानि Masterbation, गंदे दृश्य देखना, गन्दा साहित्य पढ़ना, गलत लड़को  का संग, स्त्री चिंतन आदि। 

स्वपनदोष से कैसे बचें 

स्वपनदोष से बचने के लिए अपने जीवन को सादा और स्वच्छ बनायें। अपना खान-पान सादा, शुद्ध और शाकाहारी रखें। ज्यादे तेल, मिर्च, मसाले के सेवन से बचें। कोई भी ऐसा पदार्थ जो जानवरों से आता हो जैसे - दूध, दही, घी, अंडा, मीट, मांस, चिकन आदि कभी न लें। हस्तमैथुन (Masturbation) कभी न करें यह नसों को कमजोर कर देता है, गंदे दृश्य और गन्दा साहित्य से दूर रहें, गलत लड़को  का संग हो गया है तो उनसे दूरी बना लें। अपने मन में स्त्री चिंतन यानि कामुक विचार न आने दें। 

 स्वपनदोष ठीक करने का उपाय 

अगर आप जीवन में सफलता हासिल करना चाहते हैं तो इस बीमारी पर आपको नियंत्रण पाना होगा, नहीं तो जिंदगी कोल्हू की बैल की तरह हो जाएगी। सबसे पहले आपको हस्तमैथुन से निजात पाना होगा। इससे बचने के लिए अच्छे लोगों का संग करें, एकांत में अकेले न रहें। अच्छे-अच्छे महापुरुषों का व्याख्यान पढ़ें। दूध, दही, घी, अंडा, मीट, मांस, चिकन आदि कभी न लें।  खान-पान सादा, शुद्ध और शाकाहारी रखें। ज्यादे तेल, मिर्च, मसाले का सेवन न करें। फल-फ्रूट और सलाद का अधिक सेवन करें। दवा के रूप में 80 ग्राम आंवला पाउडर और 20 ग्राम शुद्ध हल्दी पाउडर मिलाकर रख लें। 3 से 6 ग्राम खाना खाने से पानी के साथ सुबह-शाम सेवन करें। 

Learn the secret of yoga from Hatha Yoga Pradeepika

योग की प्रायोगिक क्रियायें

इस अध्याय में योगसूत्र एवं हठयोग प्रदीपिका के द्वारा योग की प्रायोगिक क्रियाक्रियाओं की विवेचना एवं समीक्षा प्रस्तावित है।
इस पर विचार करने के लिए इस अध्याय को तीन खण्डों में विभाजित किया गया है:
अ. योगसूत्र में योग की प्रायोगिक क्रियायें।
ब. हठयोग में योग की प्रायोगिक क्रियायें।
स. योगसूत्र एवं हठयोग में योग की प्रायोगिक क्रियाओं की तुलना एवं समीक्षा।

खण्ड (अ)

योगसूत्र में योग की प्रायोगिक क्रियायें प्रायोगिक क्रियाक्रियाओं का तात्पर्य प्रयोग में लायी जाने वाली क्रियाविधि से है। योगसूत्र में योग साधना बतायी गयी है। उसमें योग के आठ अंग अभ्यास के लिए बताये गये हैं, परन्तु उन अंगों की अवधारणा तो प्राप्त होती है, उनकी विधियाँ प्राप्त नहीं होती है। फिर भी यदि उनकी टीकायें देखें तो उनके कुछ ग्रन्थों में क्रियाओं की चर्चा प्राप्त होती हैं, जो हठयोग ग्रन्थों की
ही विधि को बतलाता है। अतः योगसूत्र से अवलोकन से हमें यह ज्ञात होता है कि वहाँ पर योग साधना के सिद्धान्त का पालन करने का निर्देश है न कि प्रायोगिक क्रियाओं का। इन्हीं योग की साधना का वर्णन हम पूर्व के अध्याय में कर आये हैं। अतः हम इस अध्याय के खण्ड (ब) में हठयोग के दोनों महत्वपूर्ण ग्रन्थ हठयोग प्रदीपिका एवं घेरण्ड संहिता में वर्णित योग की प्रायोगिक क्रियाक्रियाओं का विवरण प्रस्तुत करेंगे।

खण्ड (ब)

हठयोग में योग की प्रायोगिक क्रियायें। हठयोग प्रदिपिका में योग की प्रायोगिक क्रियाओं के अन्तर्गत आसन, प्राणायाम, मुद्राबंध  आदि का वर्ण न प्राप्त होता है, प्रस्तुत अध्याय में हठयोग प्रदीपिका में वर्णित आसन, प्राणायाम एवं मुद्रा की विधियों एवं उनके लाभ का विवरण दिया गया है। सर्वप्रथम हठयोग प्रदीपिका में वर्णित पन्द्रह आसनों का विवरण दिया जा रहा है, जो इस प्रकार है:

स्वास्तिक आसन

भारतीय संस्कृति में स्वास्तिक को कल्याणकारी माना है। इसलिए कोई कार्य शुरू करने से पहले स्वस्तिक (ब्रह्म) को याद करते है। इसलिए स्वस्तिक की स्वीकारते हुए वसिष्ठ, स्वात्माराम ने इसे प्रथम स्थान पर रखा है। इस आसन का वर्ण न हठयोग प्रदीपिका, घेरण्ड संहिता में समान है।
दोनों पैरों की एड़ियों को जंघाओं के मध्य में स्थापित करके सीधे बैठने की स्थिति को स्वास्तिकासन कहा जाता है। ‘‘दोनो पैरों के सलुक्रियाओं को घुटनों और जंघों के मध्य में सम्यक् प्रकार से रखकर शरीर को सीधा रखते हुए सन्तुलित बैठना ही स्वस्तिकासन है।‘‘ इस आसन के करने से पैरों के तलुओं को बहुत लाभ मिलता है। जिन व्यक्तियों के पैरों में दुर्गन्ध, पसीना और दर्द  ठीक होता है। यदि इस आसन को लगातार 40 दिन तक अभ्यास किया जाये तो पैरों के तलवों में असीम बल प्रवेश करता है। जिन व्यक्तियों के पैरों में दर्द होता हो, उन्हें यह आसन प्रतिदिन 15 मिनट करना चाहिए।

गोमुखासन (Gomukhasna)

गोमुखासन को करते समय साधक के शरीर की आकृति गाय के मुख के समान बनती है, इसलिए इस आसन को गोमुखासन कहा गया है। इस आसन को करते समय दाहिने पैर की दायें भाग में रखकर गाय के मुख के समान आकृति बनने से गोमुख आसन बनता है। इस प्रकार ‘‘दाहिनी एड़ी को कटि के वाम भाग में तथा उसी प्रकार बायें (एड़ी) को (कटि के) दायें भाग में रखकर गाय के मुख के समान आकृति बनाने से गोमुखासन होता है।‘‘

गोमुखासन करने से फेफड़ों से सम्बन्धित सभी रोगों का नाश होता है। पैरों, जंघाक्रियाओं तथा घुटनों के लिए यह आसन अत्यन्त ही उपयोगी माना जाता है। इस आसन के अभ्यास से मनुष्य को कभी भी दमा और क्षय रोग नहीं होते हैं साथ ही इस आसन को ब्रह्ममूहुर्त में करने से रक्त की शुद्धि होती है।

वीरासन (Veerasan)

वीरासन का तात्पर्य  होता है वीरों की भांति बैठना। जब दक्षिण पाद को बायीं जंघा पर तथा बायें पाद को दायीं जंघा पर उचित प्रकार से स्थापित किया जाता है, तो उसे वीरासन कहा जाता है। अतः ‘‘एक पांव को दूसरी जंघा पर तथा दूसरे पांव को अन्य जंधा के नीचे रखने से वीरासन होता है।‘‘

इस आसन के द्वारा चित्त की एकाग्रता में वृद्धि होती है। जंघाक्रियाओं तथा पिण्डलियों को असीम बल प्राप्त होता है। कुछ योगियों के अनुसार यदि इस आसन को खड़े होकर किया जाये तो यह अत्यन्त ही लाभकारी है।

कूर्मासन (Kurmasna)

इस आसन में दोनों पाँव की एड़ियों से गुदा को विपरीत भाग को दबाकर बैठा जाता है। अर्थात्, जब दायें पैर के टखने से गुदा के वाम भाग को तथा वाम टखने के द्वारा गुदा के दायें भाग को दबाकर बैठा जाता है, तब कूर्मासन होता है। इस प्रकार, ‘‘दोनों टखनों से गुहा प्रदेश को विपरित एकं पाद तथैवस्मिन्यिसेदुरूणि स्थितम। इतरस्मिस्था चोरू वीरासनमितीरितम्।। हठप्रदीपिका, 1/21।
 
क्रम से रोककर समाहित रूप से बैठने पर योगवेत्ताओं के कथनानुसार कूर्मा सन होता है।‘‘ इस आसन के द्वारा पेट, घुटने तथा जंघा से सम्बन्घित सभी रोगों का नाश होता है। बवासीर जैसे रेग नष्ट हो जाते हैं तथा श्वॅस-प्रश्वास की गति सामान्य रहती है। यदि इस आसन के अभ्यास के समय साधक पीछे की ओर झुक जाये तो मेरुदण्ड लचीला होता है, जठराग्नि की वृद्धि होती है तथा कुण्डलिनी शक्ति का जागरण होता है।

कुक्कुटासन (Kukkutasna)

जब पद्मासन लगाकर दोनों हाथों को घुटनों और जंघाओं के मध्य से निकालकर दोनों हाथों के पंजों को भूमि पर स्थापित कर देने के पश्चात् सम्पूर्ण शरीर को हाथों पर उठाकर कुछ देर तक रुकने को कुक्कुटासन कहा जाता है। इस प्रकार, ‘‘पद्मासन लगाकर जंघाओं के मध्य भाग में दोनोहाथों को लगा कर तथा उनहाथों को पृथ्वी में टिकाकार आकाश में स्थित रहने से कुक्कुटासन होता है।‘‘ जिन व्यक्तियां के हाथों में कम्पन्न होता हो, उन्हें यह आसन अवश्य करना चाहिए। इस आसन के द्वारा जठराग्नि प्रदीप्त होती है, शरीर में स्थिरता आती है, हथेलियाँ दृढ़, मणिबन्ध सुदृढ़ होता है। इसके अतिरिक्त इस आसन के अभ्यास के द्वारा दोनों हाथों एवं पैरों के साथ पिण्डलियों को असीम बल प्राप्त होता है तथा वक्षस्थल भी पुष्ट होकर फैलता है। 
गुदं निरूद्वय गुल्फाभ्यां व्युत्क्रमण सयाहितः। कूर्मासनं भवदेतदिति योगविदो विदुः।।
हठप्रदीपिका, 1/22।  पद्मासनं तु संस्थाप्यां जानूर्वोरंतरे करौ। निवेश्य भूमौ संस्थप्य व्योमस्थं कुक्कुटासनम्।।
हठप्रदीपिका, 1/23।
 

उत्तान कूर्मासन (Uttan Kurmasna)

इस आसन में जमीन पर कमर को लगाकर दोनों हाथों से गले को पकड़कर कछुए के समान उल्टा लेट जाने को उत्तान कूर्मासन कहते हैं। अतः ‘‘उक्त कुक्कुटासन का बन्धन लगाकर ग्रीवा को दोनांभुजाओं से बाँध
ले और कछुए के समान सीधा हो जाय तो उत्तान कूर्मासन हो जाता है।‘‘ इस आसन के अभ्यास के द्वारा कमर पतली, सीना चैड़ा तथा मेरुदण्ड लचीला होता है। इस आसन को यदि ब्रह्ममूर्हुत में किया जाये तो शरीर की दुर्गन्ध समाप्त हो जाती है तथा गर्दन में उत्पन्न होने वाले सभी विकार दूर हो जाते हैं। यह आसन अन्य आसनों से इसलिए अधिक महत्वपूर्ण  है क्योंकि यह शरीर को साधने वाला आसन है।

धनुरासन (Dhanurasna)

धनुरासन का अर्थ है धनुष जैसा आकार बना लेना। इस आसन में पेट के बल जमीन पर लेटकर, घुटनों से दोनों पावों को मोड़कर तथा दोनों पैरों के अंगूठों को दोनोंहाथों से पकड़कर कानों तक दानों पैरों के पंजों को खींचकर लाने के बाद शरीर की आकृति को धनुष के समान बना लेने पर धनुरासन कहा जाता है। स्वात्माराम योगी के अनुसार, ‘‘दोनों पाँवों के अँगूठों को हाथों से ग्रहण करके धनुष के समान कान तक खींचे, वह धनुरासन कहलाता है।‘‘
 कुक्कुटासनबंधस्थो दोभ्र्यां सन्ध्य कन्धराम। भवेत्कूर्मवदुत्तान एतदुत्तानकूर्मकम्।।
हठप्रदीपिका, 1/24। पादंगुष्ठौ पाणिभ्यां गृहीत्वा श्रवणावधि। धनुराकर्षणं कुर्यांद्वनुरासमुच्यते।। हठप्रदीपिका, 1/25।

इस आसन के द्वारा जठराग्नि प्रदीप्त होती है तथा उदर सम्बन्धित सभी प्रकार के रोगों का निवारण होता है। इस आसन का अभ्यास स्त्रियों के लिए अधिक उपयोगी है। इस आसन के द्वारा शरीर की चर्बी  कम होती
है तथा गर्द न का दर्द  खत्म होता है।

मत्स्येन्द्रासन (Matsyendrasna)

मत्स्येन्द्र ऋषि इसी आसन में बैठा करते थे इसी कारणवश इस आसन का नाम मत्स्येन्द्रासन कहा गया। जब दाहिने पैर को वामजंघा के मूल में रखकर तथा दाहिने पैर के घुटने के ऊपर बाएं पैर को रखते हुए दाएं पैर के घुटने के पास बाएं पैर की एड़ी को रखने के पश्चात् दायें हाथ से बाएं पैर के घुटने को बगल से दबाते हुए अंगूठे को पकड़ने के बाद बाएं कन्धे की तरफ गर्दन को घुमाया जाता है, जिससे मत्स्येन्द्रासन पूर्ण  होता है। इस प्रकार, ‘‘दाहिने पांव को बायीं जंघा के मूल में रखकर और बायें पांव को (दाहिने) घुटने के बाहर से घेरते हुए शरीर को ऐठन देकर मोड़े। तब विपरीतहाथों से दोनों पांव को पकड़कर स्थिर रखना चाहिए। यह श्री मत्स्येन्द्रनाथ का कहा हुआ आसन है।’’

इस आसन को करने से कुण्डलिनी शक्ति जागृत होती है, अभ्यासी की जठराग्नि में वृद्धि होती है तथा साधक को अनेक प्रकार के रोगों से मुक्ति प्राप्त होती है।
वामोरूमूलार्पितदक्षपादं जानोर्ब हिर्वेष्टितपत्रवामपादम्। प्रगृह्य तिष्ठेत्परिवर्ति ताग्डः श्रीमत्यनाथोदितमासनं स्यात्।। हठप्रदीपिका, 1/26।
 

पश्चिमोत्तान आसन (Padpashchimottasna)

पश्चिमोत्तान से तात्पर्य  है शरीर के पश्चिम हिस्से में खिंचवा देना। भूमि पर दोनों पैरों को दण्ड के समान सामने फैलाकर दोनों हाथों के द्वारा दोनों पैरों के अंगूठों को भली प्रकार से पकड़कर अपने घुटनों पर मस्तक को लगाते हुए शरीर को अधिक आगे की ओर खींचकर कुहनियाँ जमीन पर लगा देने से पश्चिमोत्तान आसन कहा जाता है। ‘‘दोनों पांव को भूमि पर दण्ड के समान फैलाकर, हाथों से दोनों अंगूठों को पकड़कर, घुटनों पर मस्तक लगाकर रखने से पश्चिमाेत्तान आसन कहलाता है।’’ यह आसन सभी आसनों में अग्रणी माना जाता है। इस आसन का
अभ्यास करने से भूख बढ़ती है, उदर पतला होता है तथा शरीर सभी रोगों से मुक्त हो जाता है। इसके अतिरिक्त इस आसन के द्वारा मोटापा कम होता है, रीढ़ की हड् डी, नसों व मांसपेशियों में रक्त का संचार होता है तथा
मस्तिष्क का तनाव दूर होता है।

मयूरासन (Mayurasna)

इस आसन में शरीर की आकृति मयूर के समान हो जाती है। इस आसन में दोनों हाथों को भूमि पर भली प्रकार से स्थापित करके नाभि को दोनों कुहनियो पर लगाकर सम्पूर्ण शरीर अर्थात् मस्तक से लेकर पांव तक अधर में उठाने को मयूरासन कहा जाता है। हठप्रदीपिका के अनुसार, ‘‘दोनों हाथों से पृथिवी का सहारा लेकर और मणि बन्धों के ऊपर नाभि के पाश्र्वद्वय के भागों को स्थापित करे। इस प्रकार दण्ड के समान उच्च आसन
होता है, इसे मयूरासन कहते है।’’

इस आसन को अत्यधिक कठिन आसन कहा जाता है। इस आसन को करने से वात-पित्त-कफ आदि दोष समाप्त होते हैं। इसके निरन्तर अभ्यास से कुहनियों, हथेलियों और मणिबन्धों को अधिक बल प्राप्त होता है।
उदर सम्बन्धी सभी रोगों के निवारण के साथ-साथ शरीर का कम्पन्न नष्ट होता है।

शवासन (Shawasna)

शव से तात्पर्य मृतक शरीर से है। इस आसन में पीठ के बल सीधा लेटना चाहिए। दोनों पैरों मेंदो फुट का अन्तर रखते हुए पंजे बाहर तथा एड़ी अन्दर की तरफ रखना चाहिए। इस आसन में हथेलियों को ऊपर की ओर रखना चाहिए। ग्रीवा तथा सिर भूमि पर सीधी टिकी होनी चाहिए। एक बार स्थिर हो जाने के पश्चात् शरीर को हिलाना नहीं चाहिए। ‘‘पीठ को शव के समान धरती पर लगाकर सीधा सो जाय यह शवासन है। इससे श्रम का शमन होता और चित्त को विश्राम मिलता है।’’
इस आसन के अभ्यास के द्वारा परिश्रम दूर होता है तथा चित्त की चंचलता नष्ट होती है। इस आसन को करने से रक्तचाप, नाड़ी दौबल्र्य, हृदय रोग तथा मस्तिष्क सम्बन्धी रोगों में लाभ प्राप्त होता है।
 धराभवष्टभ्य करद्वयेन तत्कपूरस्थापितनाभिपाश्र्वः। उच्चासनो दंडवदुत्थितः
स्यान्मायूरमेतत्प्रवदंति पीठम्।। हठप्रदीपिका, 1/30।
उत्तानं शववदृभूमौ शयनं तच्छवासनम्। शवासनं श्रंातिहरं चित्तविश्रांतिकारकम्।।
हठप्रदीपिका, 1/32। 

सिद्धासन (Siddhasna)

इस आसन के अभ्यास के लिए बाएं पैर की एड़ी को गुदा तथा उपस्थ के मध्य में दृढ़तापूर्व क दूसरे पैर की एड़ी को उपस्थ के ऊपर रखकर ठाेड़ी को हृदय पर भली प्रकार स्थापित कर इन्द्रियों को संयमित करके भू्रमध्य में दृष्टि लगाना चाहिए। ‘‘योनि स्थान से बाँये पाँव की एडी को मिलावे और दाँये पाँव को लिंगेन्द्रिय के ऊपर से दृढता से रखें तथा हृदय के निकट ठोड़ी को ठीक से रखे। ऐसा निश्चल योगी अपनी एक रस दृष्टि से भौंहो के मध्य में देखें। यह अभ्यास मोक्ष-मार्ग  में लगे हुए कपाट को खोलने वाला सिद्धासन कहलाता है।’’ इस आसन को समस्त आसनों में महत्वपूर्ण  माना जाता है। इसके अभ्यास के द्वारा उन्मनी कला जागृत होती है। साधक का प्राणवायु केवल कुम्भक में बन्ध जाता है। इसे मोक्ष के कपाट को खोलने वाला आसन भी माना जाता है।

पद्मासन (Padmasna)

पीठ पर दायाँ हाथ ले जाकर बाँयी जँघा पर स्थित दायें पांव के अंगूठे को पकड़कर इसी प्रकार बायें हाथ को पीठ की ओर ले जाकर बाँयें पाँव के अंगूठे को पकड़कर उसी अंगूठे से टोड़ी को हृदय के निकट चार अंगुल की दूरी पर रखकर दृष्टि को नासिका के अग्र भाग पर स्थिर करने से पद् मासन की सिद्धि होती है। ‘‘बाँयी जँघा पर बाँये पाँव को ठीक प्रकार सीधा रखकर तथा वैसे ही दायेंपाँव को जांघ के ऊपर भली प्रकार रखें और पृष्ठ भाग की विधि से दानों पॅाव के अँगूठों के हाथों से पकड़ ले फिर ठोड़ी को हृदय पर रख कर दृष्टि को नासिका के अग्र भाग पर स्थित करे। यह रोगों को नाश करने वाला पद्मासन कहलाता है। इस आसन को सभी रोगों का नाशक माना जाता है।

सिंहासन (Singhasna)

इस आसन के अभ्यास के लिए बाई एड़ी को दाहिने पाश्र्व  में तथा दायी एड़ी को वाम पाश्र्व में स्थापित करके दोनों हाथों को घुटनों के बराबर रखकर सभी अंगुलियों को फैलाकर मुख को खोलकर अपनी दृष्टि को नासाग्र भाग पर स्थिर रखना सिहासन कहलाता है। इस प्रकार, ‘‘अण्डकोशों के नीचे सींवनी पर नाड़ी के दोनों पार्श्वों में टखनों को लगावे तथा दाये पाश्र्व में बाँया टखना और बांये पाश्र्व में दाँया टखना लगााना चाहिए।
जानुओं के ऊपर हाथों के तलवे ठीक प्रकार से लगावें और हाथों की अँगुलियों को फैलाकर मुख को फैलाकर मुख को भी फैलाले और नासाग्र में दृष्टि लगाले। योगियों में श्रेष्ठ साधक द्वारा पूजित यह सिंहासन तीनों बंधों
का संधान करने वाला और उत्तम माना गया है।‘‘
इस आसन को ब्रह्मचर्य के लिए सर्वश्रेष्ठ आसन स्वीकार किया गया है। मुख को खोलने के कारण यह जीहृवा तथा गले के लिए उपयोगी माना जाता है। इस आसन के द्वारा नेत्र की ज्योति की वृद्धि के साथ साथ शरीर
में असीम बल की भी वृद्धि होती है।

भद्रासन (Bhadrasna)

इस आसन में पैरों की  एड़ियों को उपस्थ अंगों के नीचे सीवनी नाड़ी के पाश्र्व भाग में इस प्रकार स्थित करना चाहिए जिससे वाम एड़ी सीवनी नाड़ी के वाम भाग में और दाहिनी एड़ी सीवनी नाड़ी के दाहिने भाग पर आ जाये। इसके पश्चात् अपने दोनों हाथों से पैरों को भली प्रकार से पकड़कर स्थिर रहना चाहिए। हठप्रदीपिका के अनुसार, ‘‘अण्डकोशों के नीचे सीवन नाड़ी के दोनों पाश्र्व भागों टखनों को इस प्रकार रखें कि बाँया टखना बाँये पाश्र्व में और दाँया टखना दाँयें पाश्र्व में लगालें । फिर सीवनी पार्श्वों में गये हुएपाँवों को हाथों से बाँधकर दृढ़ और स्थिर करे तो यह सभी व्यक्तियों को नष्ट करने वाला भद्रासन हो जायेगा।‘‘ यह आसन सभी रोगों को दूर करने वाला है।
हठयोग प्रदीपिका के अनुसार उपरोक्त पन्द्रह आसनों का तथा उनके लाभ का वर्णन किया गया है। स्वात्माराम योगी के अनुसार इन आसनों के द्वारा व्यक्ति को स्वस्थ, निरोगी जीवन की प्राप्ति होती है। इन आसनों की
व्याख्या के उपरान्त हठयोग प्रदीपिका के अनुसार प्राणायाम तथा उनके फल का वर्णन इस प्रकार किया जा रहा है: गुल्फौ च वृषणस्याधः सीवस्यः पाश्र्व योः क्षिपेत्। सव्यगुल्फतथा सव्ये दक्षगुल्फतु दक्षिणे।। हठप्रदीपिका, 1/53। पाश्र्वपादाच पाथिभ्यां दृढं बद्ध्वा सुनिश्चलम्। भद्रासनं भवेदेतत्सर्वव्याधि विनाशकम्।।
हठप्रदीपिका, 1/54।

धौति कर्म (Dhauti Karma)

चार अंगुल लम्बे कपड़े को जल में भिगोकर धीरे-धीरे गुरु के निर्देश के अनुसार निगलना चाहिए और इसी प्रकार पुनः धीरे-धीरे निकालना चाहिए। यह धौति कर्म है। इस प्रकार, ‘‘चार अंगुल चैड़ा, पन्द्रह हाथ लम्बा कपड़ा, जल में भिगोकर गुरु के निर्दे श के अनुसार धीरे-धीर निगलना चाहिए। पुनः इसे धीरे-धीरे बाहर निकालना चाहिए, इसे
धौति-क्रिया कहते हैं।‘‘ इस धौति कर्म के द्वारा कफ के विकार दूर होने के साथ ही साथ खाँसी, जुकाम, श्वास इत्यादि दोषों से भी मुक्ति प्राप्त होती है। ‘‘धौति क्रिया के फलस्वरुप खाँसी, दमा, तिल्ली, कुष्ठ तथा अन्य बीसों प्रकार के कफ-सम्बन्धी रोग निस्सन्देह नष्ट हो जाते हैं।‘‘

वस्ति कर्म (Vasti Karma)

बाँस की छः अंगुल लम्बी नली को गुदामार्ग में प्रविष्ट करें तथा दो अंगुल नली को बाहर ही रहने दें। इसके पश्चात उत्कटासन लगाकर जल में प्रविष्ट होकर आकुंचन करे अर्थात् नौली कर्म द्वारा उदर में चलाकर निकाले। अतः ‘‘नाभिपर्यन्त जल में स्थित हो गुदा में एक नली डालकर उत्कटासन करते हुए साधक गुदा का संकोचन करे ं और अन्दर के भाग को धोयें। इसे बस्ति क्रिया कहते हैं।‘‘  धौति और वस्ति क्रिया दोनों को ही भोजन से पूर्व ही करना चाहिए तथा इस क्रिया को करने के उपरान्त भोजन कर लेना चाहिए। इस कर्म  को करने से काया रोग रहित रहती है। हठप्रदीपिका के अनुसार, ‘‘बस्ति क्रिया के अभ्यास के फलस्वरुप वायुगोला, तिल्ली, जलोदर तथा वात-पित्त-कफजन्य सभी दोष नष्ट हो जाते हैं।’’

नेति कर्म (Neti Karma)

सूत्र के एक टुकड़े को चिकना करके नाक से घुसाकर मुख के द्वारा निकाल लें। यह अणिमा आदि गुणों से सम्पन्न अथवा सिद्धों के द्वारा बताया गया कर्म कहलाता है। इस प्रकार, ‘‘चिकने और लगभग 9 इंच लम्बे सूत्र को नासिका में डालकर उसे मुख से बाहर निकालें। इसे ही योगीजन नेति कहते हैं।‘‘
इस नेति कर्म के द्वारा कपाल का शोधन होता है इसके अतिरिक्त नासानाल आदि का भी शोधन होता है। अतः ‘‘यह नेति क्रिया कपाल प्रदेश को शुद्ध करती है, दिव्य दृष्टि प्रदान करती है और स्कन्ध प्रदेश से ऊपर होने वाले रोगसमूहों को शीघ्र नष्ट करती है।‘‘

त्राटक कर्म (Tratak Karma)

त्राटक कर्म  के अनुसार योगी को चित्त को एकाग्र करके किसी भी सूक्ष्म पदार्थ नर अपनी दृष्टि को दृढ़ता से जमाकर तब तक देखना चाहिए जब तक नेत्रों से आँसू न निकल जायें। अतः ‘‘स्थिरदृष्टि से किसी सूक्ष्म लक्ष्य को एकाग्र होकर तब तक देखना चाहिए जब तक कि आँखों से आँसू बाहर न आ जाये। आचार्यो ने इसे त्राटक कहा है।‘ त्राटक कर्म के द्वारा नेत्र के रोगों का नाश, तन्द्रा, आलस्य आदि रोगों का नाश होता है। कुछ विद्वानों के अनुसार इससे साधक को सम्मोहन शक्ति भी प्राप्त होती है।
‘‘त्राटक नेत्र रोगों को दूर करता है, तथा तन्द्रा आदि को नहीं आने देता। अतः इस त्राटक को सोने की पेटी के समान महत्व देकर इसकी रक्षा करनी चाहिए।’’

नौलि कर्म (Nauli Karma)

कन्धे को था ेड़ा आगे की ओर झुकाकर तीव्र भंवरे के समान वेग से अपने उदर को दायी-बायी ओर घुमाने पर नौलि कर्म होता है। इस प्रकार, ‘‘कन्धे को थोड़ा आगे की ओर झुकाकर तीव्र गति चाले भँवर के समान उदर को दाहिने से बायें और बायें ये दाहिने ओर घुमाना चाहिए। सिद्धों के द्वारा इसे ही नौलि कहा जाता है।’’ इस कर्म के द्वारा वातादि सभी विकारों का नाश होता है। मन्द जठराग्नि को प्रदीप्त करता है तथा पाचन-क्रिया आदि तेज होती है। ‘‘सदा-सर्वदा आनन्द को लानेवाली यह नौलि-क्रियामन्द जठराग्नि को प्रदीप्त कर पाचन-क्रिया आदि को तेज करती है, विविध दोषों तथा रोगों को नष्ट करती है। यह हठक्रियाओं में श्रेष्ठ  है।’ 

कपाल भांति कर्म (Kapaal Bhati Karma)

लोहार के द्वारा किये जाने वाले चर्म की भाथी के समान जो रेचक पूरक होता है उसे कपाल भांति कहा जाता है। अतः ‘‘लुहार की धौंकनी समान शीघ्रता से रेचक-पूरक करने से कपालभाति होती है। यह कफ-रोगों को नष्ट करने वाली है।’’ इस कपालभाति कर्म  के द्वारा कफ सम्बन्धी दोष, मुटापा इत्यादि का नाश होता है। इस प्रकार इन छः प्रकार के कर्मों को करके प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए। ‘‘मुटापा, कफ-सम्बन्धी रोग तथा मल आदि का षट् क्रियाक्रियाओं द्वारा निवारण कर, तब प्राणायाम करना चाहिए। इससे प्राणायाम अनायास ही सिद्ध होता है।‘‘
इस प्रकार इन छः प्रकार की क्रियाओं का जीवन में अत्यधिक महत्व है। रोगों में षट्कर्मों का अभ्यास अत्यन्त लाभकारी होता है तथा इन षट्कर्मों का नियमित अभ्यास करने से अनेक रोग जीवन में नहीं आते हैं।
‘‘स्थूलता और कफ जिसे अधिक हो, उसे पहले छः शोधन क्रियायें करनी चाहिए किन्तु जिनमें त्रिदोषों (वात-पित्त-कफ) की समानता हो, उन्हें इन क्रियाओं के अभ्यास करने की विशेष आवश्यकता नहीं। धौति, वस्ति, नेति, त्राटक, नौलि एवं कपालभाति के छः शोधन क्रियायें कहे गये हैं। शरीर को शुद्ध करने वाली तथा आश्चर्य जनक फल देने वाली ये छः क्रियायें गोपनीय रखनी चाहिए। इसलिए योगीराजों द्वारा इन्हें बहुत महत्व दिया गया।’’
 
प्राण जीवन की शक्ति है तथा यह सर्वव्यापक ऊर्जा का मूल है। प्राण की शक्ति के कारणवश ही हमारे कान का सुनना, आँख का देखना, नासिका का सूंघना, तथा मस्तिष्क तथा बुद्धि आदि का कार्य सम्पादित हो पाता है। प्राणायाम का मुख्य लक्ष्य होता है प्राण और अपान को एक करना प्राणायाम के प्रभाव के कारण ही सोती हुई कुण्डलिनी का जागरण हो पाता है। हठयोग में आठ प्रकार के प्राणायामो का उल्लेख प्राप्त होता है। ‘‘कुम्भक आठ प्रकार के होते है- 1 सूर्यभेदन 2 उज्जायी 3 सीत्कारी 4 शीतकारी 5 भस्त्रिका 6 भ्रामरी 7 मूर्छा और 8 प्लाविनी।‘‘28 इन प्राणायामों का वर्णन इस प्रकार है:

सूर्यभेदन (SuryaBhedan)

सूर्य का अर्थ है: पिंगला तथा भेदन का अर्थ है: तोड़ना। सूर्य भेदन प्राणायाम में बार-बार पिंगला नाड़ी के द्वारा श्वास लेने को इसे सूर्यभेदन प्राणायाम कहा जाता है। सूर्यभेदन प्राणायाम करने के लिए सर्वप्रथम किसी ध्यानात्मक आसन पर बैठकर कमर मेरुदण्ड को सीधा करें। दायी अनामिका के द्वारा बायीं नासारन्ध्र को बन्द करें। दायीं नासारन्ध्र से बिना किसी भी प्रकार की ध्वनि किए श्वास भरे। अधिक से अधिक वायु को भीतर लेकर दीर्घ  श्वसन करें। ठोड़ी से वक्ष पर दबाव डालते हुए जालन्धर बन्ध को लगायें। तत्पश्चात ् धीरे-धीरे जालन्धर बन्ध को हटाकर नियन्त्रित गति से रेचक करें। ‘‘योगाभ्यासी कोई भी सुखदायक आसन बिछाकर, उस पर आसन लगाकर, दाहिने नथुने से बाहरी वायु को धीरे-धीरे अन्दर खींचकर, उसे जब तक हो सके अधिकाधिक निरोध करें। (श्वास को रोंके) और फिर बायें नथुने से श्वास को छोड़े।‘‘  इस प्रकार से सूर्यभेदन प्राणायाम करने से कुण्डलिनी शक्ति का जागरण होता है, कफ दोष दूर होते हैं, मोटापा कम होता है तथा यह क्षय तथा मृत्यु को दूर करता है।

उज्जायी (Ujjayi)

उज्जायी प्राणायाम करते समय पद् मासन में मेरुदण्ड को सीधा करते हुए ज्ञान मुद्रा में बैठे। दोनों नासिका से समान गति से हृदय से कण्ठ पर्य न्त श्वास को अन्दर लेकर कुंभक तथा जालन्धर बन्ध लगायें। तत्पश्चात लन्धर बन्ध को खोलकर दोनों नासिका के द्वारा सम की आवाज करते हुए रेचक करने से उज्जायी प्राणायाम होता है। ‘‘मुख को बन्द कर दोनों नथुनों से वायु को कुछ आवाज के साथ धीरे-धीरे इस प्रकार लेना चाहिए, जिससे कण्ठ से लेकर हृदय प्रदेश तक इसके स्पर्श का अनुभव हो।‘‘
उज्जायी प्राणायाम के द्वारा जठराग्नि बढ़ती है, साधक को कफ, रक्त, जुकाम, बुखार इत्यादि रोग नहीं होते तथा इससे सिर की गर्मी  दूर होने के अतिरिक्त अभ्यासी आकर्षक भी होता है।

सीत्कारी (Sitkari)

इस प्राणायाम में सीत की आवाज करते हुए करने के कारण इस प्राणायाम को सीत्कारी प्राणायाम कहा जाता है। सर्वप्रथम ध्यानात्मक आसन में बैठकर मेरुदण्ड को सीधा रखकर ज्ञानमुद्रा में बैठे। होंठ को खोलकर दाँतों को एक दूसरे के ऊपर दबाकर सी-सी की आवाज करते हुए मुँह से श्वास लें तथा ‘त‘ के साथ कुम्भक करते हुए जालन्धर बन्ध को लगायें तत्पश्चात् कुम्भक करने के बाद जालन्धर बन्ध खोलकर नासिका से रेचक करने के बाद सीत्कारी प्राणायाम हुआ। ‘‘मुख से सीत्कार (सी-सी की आवाज) करते ह ुए पूरक करना चाहिए और रेचक केवल नासिका से ही करनी चाहिए। इस प्रकार से अभ्यास करते हुए (साधक) दूसरा कामदेव जैसा हो जाता है।’’31 इस प्राणायाम को करने से साधक के सौन्दर्य एवं बल में वृद्धि होती है। क्षुधा, तृष्णा, निद्रा, आलस्य, मुंह का छाला, पायरिया, इत्यादि में लाभकारी होता है।

शीतली (Sitli)

सम्पूर्ण शरीर में शीतलता तथा प्रसन्नता का अनुभव कराने के कारण इस प्राणायाम को शीतली कहा जाता है। ध्यानात्मक आसन में बैठकर मेरुदण्ड को सीधा रखें। जीभ को बाहर निकालकर उसे लम्बाई में मोड़ें।
सी की ध्वनि करते हुए जिहृवा के अग्र भाग से श्वास को खींचे तत्पश्चात कुम्भक और जालन्धर बन्ध लगायें। कुछ क्षणों के बाद जालन्धर बन्ध को छ़ोड़कर दोनों नासिका के द्वारा श्वास को बाहर निकालने पर शीतली प्राणायाम होता है। ‘‘जीभ (को दोनों ओर से मोड़कर, परनाले की तरह विशेष स्थिति में लाकर, फिर उस) के द्वारा वायु अन्दर खींचकर पहले के तरह कुम्भक का अभ्यास करना चाहिए। पश्चात् बुद्धिमान (साधक) को धीरे-धीरे नासिका छिद्रों द्वारा वायु का रेचन करना चाहिए।‘‘ शीतली प्राणायाम के द्वारा मन को शान्ति मिलती है तथा चिड़चिड़ापन दूर होता है। रक्त के शोधन और भूख-प्यास, ज्वर, पित्त आदि सभी प्रकार के रोगों के प्रभाव को नष्ट करने में यह प्राणायाम अधिक लाभकारी सिद्ध होता है। इस प्रकार, ‘‘यह शीतली नामक कुम्भक वायुगोला, तिल्ली, ज्वर, पित्त, भूख, प्यास, आदि सभी प्रकार के रोगों तथा विष के प्रभाव को भी नष्ट करता है।‘‘

भस्त्रिका (Bhastrika)

भस्त्र से तात्पर्य लुहार की छोटी धौंकनी से है। इस प्राणायाम की प्रक्रिया धौंकनी के समान होने के कारण इसे भस्त्रिका कहा जाता है। पद्मासन में बैठते हुए कमर को सीधा रखकर दोनों हाथों को घुटनों पर रखना चाहिए। चित्त को एकाग्र रखकर लुहार की धौंकनी के समान बार जल्दी-जल्दी श्वास छोड़े तथा लें। इसके बाद दायीं नासिका से श्वास लेकर बायीं से छोड़कर शान्त बैठते हैं। ‘‘यह भस्त्रिका वात-पित्त-कफजन्य विकारों को दूर करती है तथा जठराग्नि प्रदीप्त करती है।‘‘  भस्त्रिका प्राणायाम के द्वारा नासिका तथा वक्ष के सभी रोगों का नाश हो जाता है, जठराग्नि प्रदीप्त होती है। यह अभ्यासी को कुण्डलिनी जागरण के योग्य बनाता है तथा प्राण को सुषुम्ना में स्थित तीनों ग्रन्थियों के भेदन योग्य बनाता है।

भ्रामरी (Bhramri)

भ्रमर से तात्पर्य है भंवरा। इस प्राणायाम में साधक के द्वारा गुंजन के समान आवाज करते हुए श्वास-प्रश्वास करने को भस्त्रिका प्राणायाम कहा जाता है। किसी भी प्रकार के ध्यानात्मक आसन में बैठने पर अपने दोनों हाथों की अंगुलियों के द्वारा दोनों कानों को बन्द करके पूरक करके रेचक को करते हुए भ्रमर के गुंजन के समान आवाज करने को भ्रामरी प्राणायाम होता है। अतः ‘‘वेग से भ्रमर-गुंजार के समान आवाज करते हुए पूरक करना चाहिए। तत्पश्चात् भ्रमरी के गुंजन के समान आवाज करते हुए धीरे-धीरे रेचक करना चाहिए। इस प्रकार अभ्यास करने से साधकों के चित्त में एक अपूर्व  आनन्द-लीला की उत्पत्ति होती है।‘‘ इस प्राणायाम के द्वारा मन एकाग्र होता है, क्रोध, चिन्ता एवं अनिद्रा का निवारण होता है। आनन्द की प्राप्ति के साथ-साथ आवाज मधुर और मजबूत होती है।

मूर्छा (Murchha)

मूच्र्छा  का तात्पर्य होता है- बेहोश हो जाना। साधक के द्वारा विषय जगत की चेतना से मूच्र्छित हो लाने के कारण इस प्राणायाम को मूर्छा कहा जाता है। ध्यानात्मक आसन में बैठकर ज्ञान मुद्रा लगाने पर दोनों नासिका के द्वारा पूरक करके जालन्धर बंध को लगायें। कुछ समय के पश्चात कुम्भक करके जालन्धर बन्ध को छाड़कर रेचक करें। गले में घर्षण होने पर बार-बार घर्षण करते हुए रेचक-पूरक करें। 


पैरासिटामोल की सच्चाई - The truth of paracetamol

बच्चों की बुखार की आम दवा पैरासिटामोल से ..यह घर घर में मौजूद एक आम दवा है इसके कई नाम है जैसे क्रोसिन, काल्पोल इत्यादि !
पैरासिटामोल के कुछ चौकाने वाले तथ्य
पैरासिटामोल का ओवरडोज (अधिक मात्रा ) जहर है और प्राणघातक है ..यह बात कई लोगो को पता नहीं है
१) ओवर डोज़ से लीवर फेल होने से मृत्यु का सबसे बड़ा कारण है
२)ज्यादा दिन लगातार लेने से किडनी फेल हो जाती है
३)लगातार लेने से लीवर पर बुरा असर पढता है और पीलिया (ज्योंडिस) हो जाता है
४)ओवरडोज क्यों होता है ? डाक्टर की लापरवाही से ..बुखार से पीड़ित डाक्टर के पास आने पर पहले से पारासिटामोल ले रहा होता है ..डाक्टर अपनी चतुराई दिखा कर उसे ‘एसिटामिनोफिन’ लेने को कहते है ..जो की पारासिटामोल का दूसरा नाम है ..मरीज़ इन दोनों को अलग दवा समझ कर दोनों लेता है ..और नतीजा ओवरडोज !
तुलसी के पत्ते और गिलोय की डण्डी का काढा बुखार उतारने में लाभदायक है
सावधान: कहीं आप भी तो ये दवाएं नहीं लेते हैं?
केंद्र सरकार ने देश में 344 दवाइयों पर रोक लगा दी है. वजह है इन दवाओं का सेहत पर पड़ने वाला हानिकारक प्रभाव. सरकार के इस आदेश के बाद से ऐसी कई दवाइयां जो बाजार में धड़ल्ले से बिक रही थीं उन पर रोक लग गई है.
मिनटों में बंद नाक, सिरदर्द और सर्दी से राहत देने का दावा करने वाली विक्स एक्शन 500 एक्स्ट्रा पर बैन लग गया है. हालांकि विक्स की तीन और दवाइओं पर बैन नहीं है. ज्यादातर लोग बचपन से इस दवा के बारे में देखते और सुनते आ रहे हैं लेकिन अब आपको ये दवा देखने को नहीं मिलेगी. इसके साथ ही
खांसी में ली जानी वाली कोरेक्स और फेंसिडिल कफ सिरप भी अब मेडिकल स्टोर से गायब हो जाएंगी.
केंद्र सरकार ने करीब 344 दवाओं पर रोक लगाई है. इनमें से कुछ हैं.
पैरासिटामोल,
फेनिल्फराइन,
कैफीन
रेबप्राजोल,
एसिक्लोफेनक,
निमेस्यूलाइड,
डाइक्लोफेनेक,
सिट्रिजन,
टाइजेनिडाइन
और फिनाइलेफ्रीन
विक्स एक्शन 500 एक्सट्रा में पैरासिटामोल फेनिल्फराइन और कैफीन का मिश्रण होता है. ऐसी कोई भी दवा जिसमें प्रतिबंधित इन दवाओं की मात्रा होगी अब उस पर रोक लग गई है.
ये तो चंद दवाएं हैं जिसके बारे में हम आप जानते हैं–ऐसी करीब 344 दवाएं हैं जिसे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रतिबंधित कर दिया है. स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन यानि एफडीसी दवाएं इंसान की सेहत पर काफी बुरा असर डालती हैं. अगर ये दवाएं आप नियमित तौर पर लेते हैं तो ये आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देती है. यानि ये फौरी तौर पर बीमारियों से लड़ने में हमें मदद तो करती हैं लेकिन धीरे-धीरे ये रोगों से लड़ने की क्षमता को ही खत्म कर देती हैं. ये स्थिति किसी भी इंसान के लिए बेहद खतरनाक होती है. ऐसी हालात में अगर आप बीमार होते है तो दवाओं का असर नहीं होता है. कुछ मामलों में तो शरीर के अंग तक काम करना बंद कर देते हैं फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन वाली दवाएं गली-मोहल्लों में आसानी से मिल जाती हैं जिसे लोग बिना डॉक्टर की सलाह के लेते हैं.
फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन के जरिए दो या दो से ज्यादा दवाओं को मिलाकर दवा तैयार की जाती है. इनमें ज्यादातर एंटीबायोटिक दवाएं होती हैं जिनका इस्तेमाल दर्द निवारक की तरह होता है. अगर इन दवाओं को ज्यादा मात्रा में लिया जाता है तो ये जानलेवा साबित हो सकती हैं. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के साथ ये लीवर को भी नुकसान पहुंचाती हैं. हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ जाता है .
#प्राकृतिक चिकित्सा फिर से प्रारम्भ करना एक मात्र स्वस्थ उपाए है अब ।

The truth of paracetamol


Paracetamol, a common drug for children's fever, is a common drug present in the house. It has many names such as Crocin, Kalpol etc.
Some shocking facts of Paracetamol
Overdose (overdose) of paracetamol is poisonous and fatal .. Not many people are aware of this

1) Liver failure due to over dose is the biggest cause of death.
2) Kidney failure due to taking more days continuously
3) Taking it continuously causes bad effect on liver and causes jaundice
4) Why does an overdose occur? Due to the negligence of the doctor .. on coming to the doctor suffering from fever, he is already taking paracetamol .. The doctor shows his ingenuity and asks him to take 'acetaminophen' .. which is another name for paracetamol .. Takes both as a separate medicine .. and the result overdose!
The decoction of basil leaves and tin can be used to remove fever.

Beware: do you even take these medicines?

The central government has banned 344 medicines in the country. The reason is the harmful effects of these medicines on health. Since this government order, many such medicines which were being sold indiscriminately in the market have been banned.

Vix Action 500 Extra, which claims to have relief from a closed nose, headache and cold, has been banned in minutes. However, three other drugs of Vix are not banned. Most people have been seeing and hearing about this medicine since childhood, but now you will not get to see this medicine. Along with this
Corex and Fensidil cough syrup used in cough will also disappear from the medical store.

The central government has banned about 344 drugs. Some of these are

Paracetamol,
Fenilphrine,
Caffeine
Rebaprazole,
Aceclofenac,
Nimesulide,
Diclofenac,
Citizen,
Tygenidine
And phenylephrine

The Vicks Action 500 Extra contains a mixture of paracetamol phenolphrine and caffeine. Any such drug which will have the quantity of these drugs banned is now banned.

These are the few medicines we know about - there are about 344 medicines which have been banned by the Union Health Ministry. According to the Ministry of Health, fixed dose combination ie FDC medicines have a very bad effect on human health. If you take these medicines regularly, then it weakens your immunity. That is, they help us in fighting diseases on an immediate basis, but gradually they only end the ability to fight against diseases. This situation is very dangerous for any human being. In such a situation, if you are ill, then medicines do not effect. In some cases, even the parts of the body stop working. Drugs with fixed dose combination are easily found in the streets, which people take without doctor's advice.

The drug is prepared by mixing two or more drugs through fixed dose combination. Most of these are antibiotics used as pain relievers. If these medicines are taken in high amounts then they can prove to be fatal. Along with the central nervous system, they also damage the liver. The risk of heart attack also increases.

# Natural medicine is the only healthy remedy now.

Share Market की जोखिम से बचना चाहते हैं तो ETF में निवेश करें

ETF यानि Exchange Traded Fund क्या है ?

ईटीएफ को एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF Full Form Exchange Traded Fund) कहा जाता है। यदि आप Share Market  की जोखिम से बचना चाहते हैं तो आप ETF  में निवेश कर सकते हैं। क्योंकि यहां पर बहुत सारे शेयर्स कंपनियों को मिलाकर एक ग्रुप ईटीएफ
etf stock
फंड बनाया गया है। ETF  के द्वारा जब निवेश करते हैं तो आपका पैसा किसी एक फंड में नहीं लगता है बल्कि Mutual Fund की तरह एक ग्रुप में आपका पैसा निवेश होता है। जिससे जोखिम की संभावना कम हो जाती है। इसलिए आप Share Market की जोखिम से बचना चाहते हैं तो ईटीएफ में निवेश कर सकते हैं। क्योंकि ETF share price भी म्यूच्यूअल फंड की तरह होता है। फर्क सिर्फ इतना है कि इसमें हम जब चाहे तब निवेश कर सकते हैं और जब चाहे तब Exit कर सकते हैं जबकि Mutual Fund में ऐसा नहीं हो पाता है।

ETF शेयर मार्केट की तरह काम करता है। लेकिन इसमें बहुत सारे फंडो को मिलकर एक ग्रुप फंड बनाया गया है। जैसे mutual fund है ठीक उसी तरह ETF के भी फण्ड हैं। दोनों में फर्क (ETF vs Mutual fund) यह है कि Mutual Fund में हम Share Market की तरह रोज खरीद और बेच नहीं सकते लेकिन ETF फंड को हम कभी भी खरीद और बेच सकते हैं। ETF फंड बहुत सारे Securities  की एक टोकरी है जो स्टॉक की तरह व्यापार करती है और आपूर्ति और मांग के आधार पर दिन भर में एक्सचेंज में सूचीबद्ध होती है। ईटीएफ शेयर मार्केट की तरह व्यापार करता है, एक ईटीएफ का शुद्ध संपत्ति मूल्य (NAV) नहीं होता है। ईटीएफ और अन्य प्रकार के इंडेक्स फंडों के बीच अंतर यह है कि ईटीएफ अपने संबंधित इंडेक्स को बेहतर बनाने की कोशिश नहीं करते हैं, लेकिन इसके प्रदर्शन को दोहराते हैं। हालांकि ईटीएफ काफी समय से अस्तित्व में है, लेकिन उन्होंने पारंपरिक Mutual Fund का आनंद लेने के लिए उस तरह की लोकप्रियता ETF In India में हासिल नहीं की है लेकिन भारत में भी ETF Investment बढ़ने की बहुत संभावना है।

विभिन्न प्रकार के ईटीएफ हैं:

Gold ETF : फिजिकल सोने का प्रतिनिधित्व करने वाली इकाइयाँ हैं जो कागज या डिमैटरीकृत रूप में हो सकती हैं। इन इकाइयों का विनिमय किसी भी कंपनी के एकल स्टॉक की तरह होता है। वे निवेशकों को सोने की भौतिक डिलीवरी लेने की आवश्यकता के बिना सोने के बुलियन बाजार में भाग लेने का एक साधन प्रदान करते हैं।

Index ETF
इंडेक्स ईटीएफ ईटीएफ का प्रकार है जिसका मूल्य इंडेक्स से लिया गया है।

विभिन्न प्रकार के Index ETF उपलब्ध है :

NIFTY BeES : एक ईटीएफ बेंचमार्क म्यूचुअल फंड द्वारा जनवरी 2002 में लॉन्च किया गया था।
Junior BeES: CNX निफ्ट जूनियर पर एक ETF, फरवरी 2003 में बेंचमार्क म्यूचुअल फंड द्वारा लॉन्च किया गया।
SUNDER: UTI द्वारा जुलाई 2003 में एक ETF लॉन्च किया गया।
Liquid BeES: जुलाई 2003 में बेंचमार्क Mutual Fund द्वारा शुरू किया गया एक ईटीएफ।
Bank BeES : ETF को बेंचमार्क म्यूचुअल फंड ने मई 2004 में लॉन्च किया था।
Shariah: Goldman Sachs CNX Nifty शरिया इंडेक्स एक्सचेंज ट्रेडेड स्कीम 22 अगस्त, 2011 को लैंच हुई।
International ETF: अंतर्राष्ट्रीय ईटीएफ विदेशी-आधारित प्रतिभूतियों में निवेश करता है। इन ETF में अंतर्निहित ट्रैकिंग उपकरण के रूप में NASDAQ, HANG SENG जैसे अंतर्राष्ट्रीय सूचकांक हैं।

Sector Specific ETF:
इन ईटीएफ में एक विशिष्ट क्षेत्र होता है जैसे कि बुनियादी ढांचा और अंतर्निहित ट्रैकिंग उपकरण के रूप में बैंक है ।

ETF के लाभ:

ETF में ट्रेडिंग सुविधाजनक है क्योंकि शेयर मार्केट के दौरान इसका भी कारोबार होता है। वितरण की लागत कम है और पहुंच व्यापक है क्योंकि ईटीएफ को एक्सचेंज में सूचीबद्ध किया गया है। ईटीएफ में सिंगल यूनिट खरीदना संभव है। Index Fund ईटीएफ के समान ही उच्च पारदर्शिता वाला है। इसमें न्यूनतम निवेश One Unit है

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