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Sep 23, 2022

कामवासना कैसे जिंदगी को नर्क बना देता है || Kamwasna Se Kaise Bachen

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स्त्री- पुरुष का आकर्षण नहीं होता तो शायद मनुष्य के जीवन जीने का कोई साधन भी न होता. स्त्री का आकर्षण पुरुष के प्रति होता है और पुरष का आकर्षण स्त्री के प्रति होता है. यही एक मुख्य कारण है जो दोनों को एक दूसरे के करीब लाता है. दोनों एक दूसरे में सुख और आनंद ढूंढ़ते हैं लेकिन सुख तो जरा सा मिलता है और बोझ जिंदगी भर के लिए बढ़ जाता है. फटिंगे कीड़े रात को जलते बल्ब को छूने की कोशिश करते हैं और तब तक वहां से नहीं हटते जब तक उनकी मौत नहीं हो जाती. यही मनुष्य का है जब तक कोई स्त्री मिल नहीं जाती तब तक बेचैन रहता है. जैसे ही उसकी शादी किसी लड़की से हो जाती है उसकी सारी गर्मी झड़ जाती है. फिर सोचता है कि इससे पीछा कैसे  छूटे.
कामवासना आदमी और स्त्री दोनों को पागल बना देता है. दोनों काम के वशीभूत होकर साथ में जीने और मरने क़ी कसमें खाते हैं. लेकिन जव काम का नशा उतरता है तब समझ में आता है कि हमने व्यर्थ में मुशीबत मोल ले ली.
ईश्वर ने जब स्त्री पुरुष को बनाया तो उनके अंदर कामसुख को डाल दिया ताकि इसके चक्कर में दोनों एक दूसरे के करीब आएं.  अगर स्त्री और पुरुष में कामवासना नहीं होती तो दोनों एक दूसरे के करीब नहीं आते. इस के के चक्कर में बड़े बड़े महापुरुष बिचलित हो गए.
अगर आप आप जीवन में सुखी रहना चाहते हैं तो कामवासना से बचें. नहीं तो यह आपको पागल करके नचाता रहेगा. आप अपने जीवन को किसी न किसी महापुरुष से जोड़ कर रखें. उन्ही के मार्गदर्शन में अपने जीवन को डाले. वही आपको इस कामरूपी दलदल से निकाल सकते हैं.
कामवासना एक ऐसी दलदल है जिसमे फंसने के बाद आदमी गंदे से गंदे काम करने को मजबूर हो जाता है. जो युवा बचपन में कामवासना से बच जाता है, वह जीवन के हर क्षेत्र में सफल हो जाता है. जो इस कामवासना के दलदल में फंस जाता है उसकी सारी जिंदगी नर्क बन जाती है. उसका ओज, तेज नष्ट हो जाता है. किसी भी काम को करने में उसका मन नहीं लगता है. स्वाभाव चिड़चिड़ा हो जाता है. नसों में जो ताकत होती है वह नष्ट हो जाता है. जवानी में ही बुढ़ापे जैसी कमजोरी हो जाती है. कामवासना के चक्कर में जब व्यक्ति अपना वीर्यनाश कर देता है तो उसको बहुत सारी आपदाए आ घेरती हैं. इसलिए आप इस कामवासना को समझें और इससे 25 साल तक दूर रहें. फिर उसके बाद आप देखेंगे क़ी आपका जीवन दुसरो क़ी अपेक्षा काफ़ी निराला है.
अगर आप किसी भी कारण से अपना वीर्य नाश कर रहे हैं तो उसकी सुरक्षा करें, नहीं तो समझ लें कि आपके ऊपर बहुत बड़ी मुसीबत आने वाली है. अभी भी समय है आप चेत जाओ.

कामवासना से कैसे बचें?

कामवासना से बचने के लिए गलत संग का त्याग कर दें. गंदे फ़िल्म और गंदे साहित्य से दूर रहें. किसी न किसी सतशास्त्र का अध्ययन करें. हो सके तो किसी ऐसे महापुरुष की खोज करें जो आपको जीवन जीने की सही कला सिखाते हों. कभी भी अकेले किसी लड़की के साथ न बैठे. अपने भोजन में तली भुनी चीजों को न शामिल करें. फल फ्रूट सलाद का अधिक सेवन करें. दूध बहुत ज्यादा वीर्य बनाता है इसलिए इसका इस्तेमाल न करें तो अच्छा है.

Sep 21, 2022

वेद-पुराणों के अनुसार तुलसी के फायदे, उपयोग व औषधीय गुण || Benefits, uses and medicinal properties of Tulsi

तुलसी सम्पूर्ण धरा के लिए वरदान है, अत्यंत उपयोगी औषधि है. मात्र इतना ही नहीं, यह तो मानव जीवन के लिए अमृत है. यह केवल शरीर के स्वास्थ्य के दृष्टि से ही नहीं बल्कि धार्मिक, आध्यात्मिक, पर्यावरणीय एवं वैज्ञानिक आदि विभिन्न दृष्टियों से भी बहुत महत्वपूर्ण है.

 

एक ओर जहाँ चरक संहिता, शुश्रुत संहिता जैसे आयुर्वेद के ग्रंथों, पद्म पुराण, स्कन्द पुराण, ब्रह्म वैवर्त आदि पुराणों तथा उपनिषदों एवं वेदों में भी तुलसी की महिमा एवं उपयोगिता बताई गयी है. वहीं दूसरी ओर यूनानी, होमियोपैथी एवं Allopaithy चिकित्सा पद्धति में भी तुलसी एक महत्वपूर्ण औषधि मानी गयी है तथा इसकी खूब सराहना की गयी है.
विज्ञान ने विभिन्न शोधों के आधार पर माना है कि तुलसी एक रोगणूरोधी, तनावविरोधी, दर्द निवारक, मधुमेहरोधी, ज्वारनाशक, कैंसर नाशक, चिंता निवारक, अवसाद रोधी, विकिरण रक्षक है. तुलसी इतने सारे गुणों से भरपूर है कि  इसकी महिमा अवर्णनीय है. पद्म पुराण में भगवान शिव कहते हैं  "तुलसी के सम्पूर्ण गुणों का वर्णन तो बहुत अधिक समय लगाने पर भी नहीं हो सकता."
अपने घर में, अपने आस पड़ोस में अधिक से अधिक संख्या में तुलसी के पौधे लगाना व लगवाना मानो हजारों लाखों रुपयों का स्वास्थ्य खर्च बचाना है. पर्यावरण रक्षा करना है.
हमारी संस्कृति में हर घर आंगन में तुलसी लगाने की परंपरा थी. संत बिनोबा जी भावे की माँ बचपन में उन्हें तुलसी को जल देने के बाद ही भोजन देती थीं. पाश्चात्य अंधानुकरण के कारण जो लोग तुलसी की महिमा को भूल गए, अपनी संस्कृति के पूजनीय वृक्षों, परंपराओं को भूल भूलते गए और पाश्चात्य परम्पराओं व तौर तरीकों को अपनाते गए, वे लोग चिंता, तनाव, अशांति एवं विभिन्न शारीरिक, मानसिक विमारियों से ग्रस्त होते गए.
इस घोर नैतिक पतन से व्यथित होकर पूज्य संत देवराहा बाबा ने प्रेरणा दी कि तुलसी, पीपल, आँवला, नीम - इन चार लाभकारी वृक्षों के रोपण का अभियान चलाया. प्रतिदिन तुलसी को जल देकर उसकी परिक्रमा करें. तुलसी पत्रों का सेवन करें.  प्रतिवर्ष 25 दिसंबर को तुलसी पूजन दिवस मनाएं.
तुलसी की महत्ता जन जन तक पहुँच सके और लोग इसका लाभ लें सकें इस उद्देश्य से मैं यह आर्टिकल लिख रहा हुँ.

तुलसी की महत्ता

तुलसी का पौधा ओजोन वायु छोड़ता है. ओजोन वायु वातावरण के जीवाणु, विशाणु, फफूँदी आदि को नष्ट करके ऑक्सीजन O2 में रूपांत्रित हो जाती है. तुलसी उत्तम प्रदुषण नाशक है.

गुणों की खान है तुलसी

तुलसी बड़ी पवित्र एवं अनेक दृस्टियों से महत्वपूर्ण है. यह माँ के समान सभी प्रकार से हमारा रक्षण व पोषण करती है. हिन्दुओं के प्रत्येक शुभ कार्य में भगवान के प्रसाद में तुलसी दल का प्रयोग होता है. जहाँ तुलसी के पौधे होते हैं, वहां की वायु शुद्ध और पवित्र रहती है. तुलसी के पत्तों में एक विशिष्ट तेल होता है जो कीटाणु युक्त वायु को शुद्ध करता है. तुलसी की गंधयुक्त वायु से मलेरिया के कीटाणुओं का नाश होता है. तुलसी में एक विशिष्ट क्षार होता है. जो दुर्गन्ध को दूर करता है. जिसके मुँह से दुर्गन्ध आती हो वह रोज तुलसी के पत्ते खाये तो मुँह की दुर्गन्ध दूर होती है.

तुलसी के विभिन्न नाम

वनस्पति शास्त्र की भाषा में इसे ओसिमम सेंकटम (Ocimum Sanctum) कहा जाता है. तुलसी को विष्णुप्रिया, सुरसा (जिसका रस सर्वोत्तम हो), सुलभा (सरलता से उपलब्ध हो), बहुमंजरी (बहुत सारी मंजरियां लगती हैं), ग्राम्या (गावों में अधिक होनेवाली तथा घर घर में लगायी जाने वाली), अपेतराक्षसी ( दर्शन मात्र से राक्षस एवं राक्षसों जैसे पांप भाग जाते हैं), शूलघनी ( शूल अर्थात दर्द अन्य रोगों का नाश करनेवाली), देवदनंदुभी (देवों के लिए आनंददायक) आदि नामों से गौर्वान्वित किया गया है.

तुलसी के प्रकार

1. राम तुलसी ( हरे पत्ते वाली 2. कृष्ण तुलसी ( काले पत्तेवाली). औषधि के रूप में प्रायः कृष्ण तुलसी का उपयोग किया जाता है.

तुलसी के गुण धर्म

आयुर्वेद के अनुसार तुलसी कड़वी, तिक्त, उष्ण, कफ -वातशामक, कृमि - दुर्गन्ध नाशक, जठराग्नि वर्धक, रक्त शोधक, हृदयतेजक तथा पित्त वर्धक है.
तुलसी अनेक रोगों की रामबाण औषधि है. पदम् पुराण में लिखा है कि संसार भर के फूलों और पत्तों से जितने भी पदार्थ व दवाइयाँ बनती हैं, उनसे जितना आरोग्य मिलता है, उतना ही आरोग्य तुलसी के आधे पत्ते से मिल जाता है.

 
 
 
 
तुलसी की जानकारी हिंदी में (tulsi information in hindi)
तुलसी का वानस्पतिक नाम एवं कुल (Botanical name and family of Tulsi)
तुलसी के नुकसान (Disadvantages of Basil)
तुलसी का आर्थिक महत्व (Economic importance of basil)
सुबह खाली पेट तुलसी खाने के फायदे (Benefits of eating basil empty stomach in the morning)
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तुलसी का उपयोग कैसे करें (how to use basil)
तुलसी के फायदे (benefits of Tulsi)

Sep 20, 2022

Biography of Raveena Tandon || Raveena Tandon Hot HD Movie Photo

रवीना टंडन (Raveena Tandon) का जन्म 26 अक्टूबर 1972 को हुआ था। वह एक भारतीय अभिनेत्री हैं जो हिंदी फिल्मों में काम करती हैं। निर्देशक रवि टंडन की बेटी, उन्होंने 1991 की एक्शन फिल्म पत्थर के फूल से अभिनय की शुरुआत की, जिसने उन्हें वर्ष के नए चेहरे के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार जीता। टंडन ने व्यावसायिक रूप से सफल एक्शन ड्रामा दिलवाले (1994), मोहरा (1994), खिलाड़ियों का खिलाड़ी (1996), और ज़िद्दी (1997) में प्रमुख महिला की भूमिका निभाकर खुद को स्थापित किया।

उन्होंने 1994 के नाटक लाडला में अपनी भूमिका के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामांकन अर्जित किया और 1990 के दशक के अंत में, उन्होंने गोविंदा के साथ बड़े मियां छोटे मियां (1998), दुल्हे राजा (1998) और कई सफल कॉमेडी में सहयोग किया। अनारी नंबर 1 (1999)। उन्होंने अपराध नाटक गुलाम-ए-मुस्तफा (1997) और शूल (1999) में भी टाइप के खिलाफ अभिनय किया।

2000 के दशक में, Raveena Tandon ने 2001 की फिल्मों दमन और अक्स में भूमिकाओं के साथ आर्टहाउस सिनेमा में कदम रखा, दोनों ने उनकी आलोचनात्मक प्रशंसा प्राप्त की, पूर्व के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और बाद के लिए फिल्मफेयर विशेष प्रदर्शन पुरस्कार जीता। फिल्म वितरक अनिल थडानी के साथ शादी के बाद टंडन ने फिल्मों से ब्रेक ले लिया। वह रुक-रुक कर टेलीविजन पर सहारा वन ड्रामा साहिब बीवी गुलाम (2004), डांस रियलिटी शो चक दे ​​बच्चे (2008) और टॉक शो इसी का नाम जिंदगी (2012) और सिंपल बातें विद रवीना (2014) जैसे शो में दिखाई दीं। कई वर्षों के अंतराल के बाद, टंडन ने थ्रिलर मातृ (2017) में अभिनय किया और के.जी.एफ: अध्याय 2 (2022) में सहायक भूमिका में दिखाई दिए। 2021 में, उन्हें नेटफ्लिक्स क्राइम थ्रिलर वेब सीरीज़ अरण्यक में अभिनय करने के लिए प्रशंसा मिली।



रवीना टंडन का प्रारंभिक जीवन (Early Life of Raveena Tandon)
टंडन का जन्म बॉम्बे (वर्तमान मुंबई) में रवि टंडन और वीना टंडन के घर हुआ था। टंडन चरित्र अभिनेता मैक मोहन की भतीजी हैं और इस प्रकार उनकी बेटी मंजरी मकिजनी के चचेरे भाई हैं।  उनका एक भाई राजीव टंडन है, जिसकी शादी अभिनेत्री राखी टंडन से हुई थी। वह अभिनेत्री किरण राठौड़ की चचेरी बहन भी हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक मॉडल के रूप में की थी। Raveena Tandon एक पर्यावरणविद् भी हैं और 2002 से पेटा के साथ काम कर रही हैं। टंडन के चार बच्चे हैं, दो गोद लिए हैं और दो अपने पति के साथ हैं।

Raveena Tandon ने  जुहू के जमनाबाई नरसी स्कूल में अपनी शिक्षा प्राप्त की और मुंबई के मीठीबाई कॉलेज में पढ़ाई की। जेनेसिस पीआर में इंटर्नशिप के दौरान उन्हें पहली फिल्म का ऑफर मिला। रेडिफ टंडन के साथ एक साक्षात्कार में कहा, "मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं अभिनेत्री बनूंगी। मैं जेनेसिस पीआर में इंटर्न था, [एड-मैन] प्रह्लाद कक्कड़ की मदद कर रहा था, जब मेरे दोस्त और मेरे आसपास के लोग मेरे लुक्स की तारीफ करने लगे। लेकिन [फोटोग्राफर-निर्देशक] शांतनु शौरी ने मुझे पहला ब्रेक दिया। उसने फोन किया और कहा कि वह मेरे साथ शूटिंग करना चाहता है। ये वो दौर था जब मॉडल्स एक्ट्रेस बन रही थीं।  मैंने फिल्मों के ऑफर ठुकरा दिए। प्रह्लाद कहता रहा कि लाखों लोग इस मौके का इंतजार कर रहे हैं और आप इसे ठुकराते रहती हैं। इसलिए मैंने सोचा कि खोने के लिए कुछ नहीं है। लेकिन वह फिर पत्थर का फूल साबित हुआ।

रवीना टंडन का 1990 के दशक में पदार्पण और सफलता (Raveena Tandon's Debut and Success in the 1990s)
टंडन ने पत्थर के फूल (1991) फिल्म से शुरुआत की, जो हिट रही;  उन्हें उनके प्रदर्शन के लिए लक्स न्यू फेस ऑफ द ईयर के लिए फिल्मफेयर अवार्ड मिला। 1994 में, मोहरा, दिलवाले और लाडला जैसी कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर हिट रहीं। फिल्म मोहरा में "तू चीज बड़ी है मस्त मस्त" गीत में उनके प्रदर्शन के बाद उन्हें "मस्त मस्त गर्ल" उपनाम दिया गया था। लाडला ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामांकित भी किया। उस वर्ष की उनकी अन्य रिलीज़ में सनी देओल के साथ थ्रिलर इम्तिहान और सैफ अली खान और पंथ कॉमेडी अंदाज़ अपना अपना शामिल थी ।


1995 में, उन्होंने ज़माना दीवाना में पहली बार शाहरुख खान के साथ अभिनय किया; फिल्म अच्छा प्रदर्शन करने में असफल रही। सनी देओल के साथ खिलाडिय़ों का खिलाड़ी (1996) और ज़िद्दी (1997) जैसी हिट फिल्मों के साथ उनका करियर पटरी पर लौट आया, जो उस साल की ब्लॉकबस्टर हिट और सालाखें (1998) बन गई। वर्ष 1997 की एक और हिट, गुलाम-ए-मुस्तफा में उनके प्रदर्शन के लिए उन्हें प्रशंसा भी मिली।
1998 में, Raveena Tandon की आठ रिलीज़ हुईं। उस वर्ष की उनकी आखिरी रिलीज़, बड़े मियाँ छोटे मियाँ, अमिताभ बच्चन और गोविंदा की सह-अभिनीत, वर्ष की दूसरी सबसे बड़ी हिट साबित हुई। टंडन को कुछ कुछ होता है में दूसरी लीड की पेशकश की गई थी, जो 1998 की सबसे बड़ी हिट थी, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया। उस वर्ष की उनकी अन्य रिलीज़ घरवाली बहारवाली थीं, जिन्होंने औसत से नीचे का दर्जा हासिल किया, विनाशक, परदेसी बाबू और आंटी नंबर 1, जो सभी असफल रहीं। 1999 में, टंडन ने उपेंद्र के साथ अपनी आत्म-शीर्षक कन्नड़ मनोवैज्ञानिक थ्रिलर फिल्म, उपेंद्र में अभिनय किया। शूल में उनके प्रदर्शन के लिए उन्हें आलोचकों से भी प्रशंसा मिली।

रवीना टंडन का 2020 में ओटीटी डेब्यू (Raveena Tandon's OTT debut in 2020)
2021 में, टंडन ने नेटफ्लिक्स क्राइम थ्रिलर वेब सीरीज़ अरण्यक के साथ अपना ओटीटी डेब्यू किया, और अपने प्रदर्शन के लिए सकारात्मक समीक्षा प्राप्त की। 2022 में, रवीना टंडन K.G.F: अध्याय 2 में एक महत्वपूर्ण भूमिका में दिखाई दिए, जो अब तक की तीसरी सबसे अधिक कमाई करने वाली भारतीय फिल्म बन गई। टंडन संजय दत्त के साथ बिनॉय गांधी की रोमांटिक कॉमेडी फिल्म घुड़चड़ी में दिखाई देंग

Sep 18, 2022

देश की राजधानी दिल्ली की सच्चाई || Rajdhani Delhi Ki Hakikat

दिल्ली हमारे देश की राजधानी है. दिल्ली में सारे मंत्री और नेता रहते हैं. यहाँ प्रशासनिक बहुत सारे हेड ऑफिस भी हैं. यहाँ प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री भी रहते हैं फिर भी यहाँ क्राइम कम नहीं होता है. दिल्ली में जेब कतरे और लुटेरों की भरमार है. ऐसा कोई क्राइम नहीं है जो दिल्ली में न होता हो.

दिल्ली के जेब कतरे (Dilli Ke Jeb Kabre)


सवाल यह है कि जिस देश क़ी राजधानी का यह हाल है. उस देश में और क्या क्या होता होगा. मैं दिल्ली में पिछले आठ से रह रहा हुँ. यहाँ बसों में जेब कतरों  का एक झुण्ड चढ़ता है और लोगों के जेबों से पैसे और मोबइल निकाल लिया जाता है. कोई डर के मारे कुछ नहीं बोलता है क्योंकि उनके हाथों ब्लेंड और धारदार हथियार होते हैं. बस वालों को भी पता होता है कि यह सब जेब कतरे हैं. फिर भी वह डर के मारे कुछ नहीं बोलते. मेरा कोई भी ऐसा जान पहचान वाला नहीं होगा जिसकी जेब न कटी हो.

दिल्ली में रात को निकलना (Dilli Me Raat ko Nikalna)

दिल्ली में बहुत सारे ऐसे इलाके हैं जहाँ रात को 10 बजे के बाद घर से बाहर निकाल जाओ तो जो भी पास में घड़ी, मोबाइल पैसा आदि होगा सब लूट लेंगे. यहाँ पुलिस कि जिप्सी खूब घूमती है फिर भी क्राइम वैसे का वैसे ही है. मेरे आँखों के सामने शाम 7 बजे आनंद विहार बस अड्डे के पास से एक जेब कतरा एक महिला का पर्स हाथ में से छीनकर भागा और दीवाल फादकर छाड़ी में जाकर छुप गया.

दिल्ली में स्त्रियों का शोषण (Dilli Me Striyon का Shoshan)

दिल्ली में पुलिस ने कई spa Center पर छापा मारा था जहाँ मसाज के नाम पर देह व्यापार होता था. दिल्ली में जीबी रोड है जहाँ खुलेयाम वेश्यालय चलता है. इसके अलावा रोज कहीं न कहीं बेटी बहुओं के साथ दुष्कर्म की खबर जरूर सुनने को मिल जाती है.

दिल्ली के पार्को का हाल (Dilli ke Parkon ka Haall)

दिल्ली में बहुत सारे पब्लिक पार्क हैं. जहाँ सन्डे को चले जाओ तो आंखे बंद करनी पडती है. पब्लिक पार्क में लड़के और लड़कियां ऐसे सोये रहते हैं. जैसे शादी करके सबके सामने हनीमून मना रहे हों. पार्को में लोग शांति और आनंद के साथ घूमने के लिए जाते हैं लेकिन वहां की विचित्र दशा देखकर घर लौट जाते हैं.

दिल्ली क़ी सब्जी मंडी (Delhi क़ी Sabji Mandi)

दिल्ली की बड़ी सब्जी मंडियों में खूब सस्ती सब्जी मिलती है लेकिन अगर हम सेक्टर और सोसाइटी में रहते हैं तो वही सब्जी 3 से 4 गुने महंगे मिलता है. वही हाल फलों का भी है.

दिल्ली के रिक्शा वाले (Delhi ke Rikshwa Wale)

दिल्ली में अगर आप पहली बार आते हैं और अपने किराये पर कहीं जाने के लिए रिक्शा बुक कर लिया तो वह भी आपको लूटने की पूरी कोशिश करते हैं. एक किलोमीटर अगर आपको जाना है तो 5 किलोमीटर घुमाकर ले जायेंगे.

दिल्ली में मजदूरों की हालत (Delhi Me Majduron Ki Halat)

दिल्ली में यूपी बिहार से हजारों मजदूर आकर काम करते हैं लेकिन उनको सही मजदूरी नहीं मिलती है. ठेकेदार आधे पैसे देते हैं और आधे खा जाते हैं. कई जगह तो मजदूरों के कई महीने के पैसे हड़प कर जाते हैं. कहीं कोई सुनवाई नहीं होती है. 

मैं अपने देश के नेताओं और मंत्रियों से अपील करता हुँ कि आपलोग जिस दिल्ली रहते हैं, उसका यह हाल है तो बाकी राज्यों का क्या होगा. कम से कम आपलोग देश क़ी राजधानी दिल्ली को तो सुधार दें.


Sep 17, 2022

आखिर एक लड़की क्या चाहती है? || Love ki Paribhasa Kya Hai?

हर एक लड़की की ख्वाहिश यही होती है कि काश ! मुझे एक स्मार्ट लड़का मिल जाय. जो हमारा ख्याल रखने वाला हो. कोई भी लड़की यह नहीं चाहती कि उसका पति केवल पैसे वाला हो. क्योंकि पैसा तो आता है और चला जाता है. लड़की लाइफ पार्टनर ऐसा चाहती है जो उसकी आज्ञा का पालन भी करें यानि लड़की ने जो कहा और लड़का उसका काम तुरंत कर दे.

लड़कियाँ कैसे बेवकूफ बनती हैं? (Ladkiyon ki Bevkufi)

वास्तव मे पुरे विश्व कि लड़कियां बहुत भोली भाली होती हैँ. एक आध ही ऐसी होती हैं जो बहुत समझदार होती हैं. लड़के बहुत जल्दी लड़कियों को अपने जाल मे फंसा लेते हैं और अपना काम पूरा होने के बाद उनसे पीछा भी छुड़ा लेते हैं. लड़के पहले लड़कियों कि खूब तारीफ करते हैं फिर उन्हें तरह तरह के गिफ्ट देते हैं. लड़की समझती है कि यह हमारा केयर टेकर बन सकता है और उसके झांसे में आ जाती है. इसी टेक्निक को अपना कर लड़के फायदा उठाते हैं.

लड़के कैसे बेवकूफ बनते हैं? (Ladkon ki Bevkufi)

आजकल कालेज में कोई भी स्मार्ट लड़की किसी लड़के के तरफ एक बार देख लेती है तो वह दीवाना हो जाता है. वह सातवे आसमान में उड़ने लगता है. लड़कियां लड़कों की कमजोरी को अच्छी तरह समझती हैं. उन्हें पता होता है कि हर पुरुष काम का भूखा होता है. इसलिए आजकल ज्यादातर लड़कियां पुरुषों का इस्तेमाल अपने मन को बहलाने के लिए करती हैं. पुरुष उनके मायाजाल में पागल तक हो जाता है. वह तो प्यार का ऐसा सपना संजोता है कि उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती. लेकिन लड़की बेपरवाह होकर जीती है और लड़का रात दिन उसकी याद में तड़पता रहता है. फिर एक दिन मेंटली डिस्टर्ब हो जाता है.

प्यार क्या होता है? (Pyar Kya Hota Hai)

ज़ब दो दिलों के बीच एक शुद्ध प्रेम होता है तो दोनों एक दूसरे से मिलने के लिए बेचैन रहते हैं. इस प्यार में न ग़रीबी अमीरी का भेद होता है और न काला या गोरा होने का भेद रहता है. यहाँ प्यार दो आत्माओं के बीच का एक ऐसा मिलन होता है जिसमे कामवासना का कोई जगह नहीं होता है. इस प्यार में एक ऐसी याद होती है जो हमारे गहरे अंतर्मन में जाकर अपना जगह बना लेती है. प्रेमी का शरीर कहीं भी हो लोग उसकी यादों से जिंदगी जी लेते हैं. दादू दीनदयाल ने कहा है -
दादू दरिया प्रेम का जो डूबे वे तर गए और जो उबरे वह डूब गए.
असली Love तो यही होता है. वास्तव में प्यार किया नहीं जाता है. वह तो हो जाता है. जो किया जाता है या बनाया जाता है वह टूट जाता है.

प्यार क्यों करें? (Pyar Kyon Karen)

प्यार के बिना कोई जीवन नहीं है. हर प्राणी किसी न किसी से जरूर प्यार करता है. माँ अपने बेटे से प्यार करती है. बहन अपने भाई से प्रेम करती है. पिता भी अपने बेटे से प्यार करता है. अगर जीवन से केवल प्यार को हटा दे तो जीवन में कुछ नहीं बचता है. प्यार के बिना जिंदगी खोखली हो जाती है. प्यार ही हमें जीने की उम्मीद जगाता है. हर आदमी किसी न किसी के प्यार में जी रहा है. प्यार के बिना जिंदगी अधूरी है.
इसलिए आप अपने जीवन में सबसे प्रेम करना सीखें. क्योंकि हम सब एक ईश्वर के संतान हैं. इसलिए सब अपने हैं.

Sep 16, 2022

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