क्यों मनाया जाता है श्री कृष्ण जन्माष्टमी का महामहापर्व

जब विष्णु भगवान का अवतार हुआ तो उन्होंने वासुदेव को आदेश दिया कि गोकुल में ले जाकर नंद बाबा के घर उन्हें पहुंचा आये। जहां पर वह मामा कंस से सुरक्षित बचे रहेंगे। श्री कृष्ण का पालन पोषण माता यशोदा और नंद बाबा ने मिलकर किया। बस उनके जन्म की खुशी मैं तभी से हर वर्ष श्री कृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार मनाया जाता है। जन्माष्टमी को केवल साधु संत ही नहीं बल्कि सारे समाज के लोग मिलकर इस पर्व में हिस्सा लेते हैं। श्री कृष्ण युगो युगो से भारतीय संस्कृति के धरोहर माने जाते हैं।  भगवान श्री कृष्ण हमारे आस्था के केंद्र  हैं वह कभी यशोदा मैया के लाल बने तो कभी ब्रिज गोपियों का सखा।
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क्यों हुआ भगवान श्री कृष्ण का अवतार ?

पृथ्वी पर जब बहुत ही शोशक राजा बढ़ गये और प्रजा का खून चूसने लगे जिससे प्रजा त्राहिमाम त्राहिमाम पुकारने लगी। दूध, दही, मक्खन भी पैदा करने वाले ग्वाल गोपिया और आम नागरिक अपनी मेहनत मजदूरी करने के बावजूद भी वह ठीक से खा पी नहीं पाते थे। कंस के पहलवानों को भी प्रजा को देना पड़ता था। जब राजा अति शोषण करने लगा था तब वह प्रात परब्रह्म अष्टमी की मध्यरात्रि को मथुरा के राजा कंस के कारागृह में चतुर्भुजी रूप से प्रगट हुआ। लेकिन चतुर्भुजी रूप को देखकर मां देवकी व पिता वासुदेव ने उस से प्रार्थना की तो वही परब्रह्म नन्हे बालक का रूप हो गए। उस बालक कृष्ण कन्हैया को वासुदेव जी टोकरी में ले कर चल दिए मथुरा नंद बाबा के घर। जब यमुना नदी में प्रवेश किए तो यमुना जी ने देखा कि अपनी योग माया से सर्व व्यापक ब्रह्म इतना नन्ना बन गया है। जो सर्व में समाया हुआ है और विशेष रूप से नन्ना मुन्ना होकर भी पिता की टोकरी में मुझ यमुना से होकर गुजर रहा है। ऐसे परात्पर प्रभु के चरण छूने का मौका मैं कैसे छोड़ दूं। यमुना का पानी उछल कूद करने लगा तो वासुदेव जी घबराने लगे। वासुदेव जी की घबराहट को देखकर यमुना उस परात्पर ब्रह्म प्रभु से प्रार्थना करने लगी तुम मुझे अपना अंगूठा तो छू लेने दो। जैसे ही यमुना का जल प्रभु के चरण को लगा फिर यमुना का स्तर घटने लगा और वासुदेव जी नदी पार होकर यशोदा के घर पहुँच गए।

जन्माष्टमी कब और क्यों मनाई जाती है ?

 भगवान श्री कृष्ण के जन्म दिवस को जन्माष्टमी पर्व के रूप में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। जो रक्षाबंधन के बाद भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को यह पर्व आता है। श्री कृष्ण देवकी और वासुदेव के आठवें पुत्र माने जाते हैं। मथुरा नगरी का राजा जो बहुत ही निर्दई और अत्याचारी था। उसके अत्याचार दिन प्रतिदिन बढ़ गए थे कि एक दिन आकाशवाणी हुई। उसकी मृत्यु उसकी बहन का आठवां पुत्र ही करेगा। यह सुनकर कंस बड़ा दुखी हुआ और उसने ठान लिया की बहन के आठवें पुत्र को जीवित नहीं छोड़ेंगे। इसके बाद उसने अपनी बहन देवकी और जीजा वासुदेव को कालकोठरी में डाल दिया। देवकी के जो 7 बच्चे पैदा हुए उनको एक एक करके मार डाला। जब विष्णु का अवतार हुआ तो  उन्होंने वासुदेव को आदेश दिया कि गोकुल में ले जाकर नंद बाबा के घर उन्हें पहुंचा आये। जहां पर वह मामा कंस से सुरक्षित बचे रहेंगे। श्री कृष्ण का पालन पोषण माता यशोदा और नंद बाबा ने मिलकर किया। बस उनके जन्म की खुशी मैं तभी से हर वर्ष श्री कृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार मनाया जाता है।

जन्माष्टमी की तैयारियां 

श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन भारत के लगभग सभी मंदिरों को विशेष तौर पर सजाया जाता है। जन्माष्टमी पर लोग पूरे दिन व्रत रखते हैं। जन्माष्टमी पर सभी रात के 12:00 बजे तक कुछ नहीं खाते हैं। मंदिरों में झांकियां बनाई जाती है और भगवान कृष्ण को झूला झुलाया जाता है। कहीं कहीं तो लोग रासलीला का भी आयोजन करते हैं। दही हांडी और मटका फोड़ कार्यक्रम जन्माष्टमी के दिन पूरे देश में आयोजित करते हैं। दही हांडी प्रतियोगिता में छोटे बच्चे जो बाल गोपाल होते हैं वह भाग लेते हैं। छाछ दही आदि से भरी मटकी रसी से एक ऊंचे शिखर पर लटका दी जाती है और बाल गोपालों द्वारा मटकी फोड़ने का कार्यक्रम किया जाता है। जो विजेता टीम मटकी फोड़ देता है वह इनाम का हकदार होता है।

जन्माष्टमी का व्रत 

श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन व्रत रखने का बरसों से भारत में एक विधान बना हुआ है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार सभी लोग फलाहार और रसाहार का सहारा लेते हैं। कोई भी भगवान हमें भूखा रहने के लिए नहीं करता है। इसलिए अपनी योग्यता और श्रद्धा के अनुसार व्रत करना चाहिए। पूरे दिन व्रत में अगर आप कुछ भी नहीं खाते हैं तो आपसे स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए हमें भगवान श्री कृष्ण के संदेशों को अपने जीवन में अपनाने का प्रयास करना चाहिए। 

Why is Sri Krishna Janmashtami celebrated

 When Vishnu became an incarnation of God, he ordered Vasudeva to take him to Gokul and reach Nanda Baba's house. Where he will remain safe from Mama Kahn. Mother Krishna's nurturing mother-daughter Yashoda and Nand Baba did together. Just since the birth of his birth, I celebrate the birthday of Lord Krishna Janmashtami every year. On Janmashtami, not only saintly saints but people from all the society come together to participate in this festival. Shri Krishna Yugo is considered as the heritage of Indian culture from Yugo. Lord Shri Krishna is the center of our faith. He is the Yashoda Mai's red, and sometimes the bridge gopis.

Why Lord Krishna's avatar happened?

When on earth the very exploitative kings grew and started sucking the blood of the subjects, due to which the people started calling the people. Gwal Gopiya, who created milk, curd and butter, and the common man, despite his hard earned wages, could not eat properly. Kansa wrestlers also had to give to the subjects. When the king began to exploit, then it was revealed in the quadrennial form of Pratash Brahma Ashtami on the midnight of the Jail of Raja Kath in Mathura. But after looking at the quadrbuji form, mother Devaki and father Vasudev prayed to him, then that same Parabrahma became a form of young child. The child, Krishna Kanhaiya, was taken to Vasudev ji basket and walked to the house of Mathura Nand Baba. When Yamuna entered the river, Yamuna ji saw that all the elaborate Brahma has become so Nanna from its Yoga Maya. One who is absorbed in everything and especially being a nunna, is passing through Yamuna in the father's basket. How do I leave the opportunity to touch the feet of such a divine God? When Yamuna's water jumped jumpy, Vasudev ji began to panic. Seeing the nervousness of Vasudev ji, Yamuna started praying to the Supreme Brahma Lord, then let me touch your thumb. As soon as the water of Yamuna hit the feet of the Lord, then the level of Yamuna started to decrease and Vasudev ji crossed the river and reached Yashoda's house.

When and why is Janmashtami celebrated?

 The birth day of Lord Shri Krishna is celebrated with great pomp as Janmashtami festival. After Rakshabandhan, this festival comes on the Ashtami date of Krishna Paksha of Bhadrapada month. Shri Krishna is considered as the eighth son of Devaki and Vasudeva. The King of Mathura was very cruel and oppressive. His atrocities were increased day by day that one day the radio came. He will die the eighth son of his sister. After hearing this, Kense was very unhappy and he decided that the eighth son of his sister would not be alive. After this he put his sister Devaki and Jija Vasudev in the dungeon. The 7 children born to Devaki were killed one by one. When Vishnu was incarnated, he ordered Vasudeva to take him to Gokul and reach Nanda Baba's house. Where he will remain safe from Mama Kahn. Mother Krishna's nurturing mother-daughter Yashoda and Nand Baba did together. Just since the birth of his birth, I celebrate the birthday of Lord Krishna Janmashtami every year.

Janmashtami preparations

On the day of Lord Krishna Janmashtami, almost all the temples of India are specially decorated. People on Janmashtami keep fast for the whole day. On Janmashtami, all eat nothing till 12:00 pm. Flames are made in temples and Lord Krishna is swinging swing. Somewhere people also organize Rasalila. Dahi Handi and Matka Phod are organized on the day of Janmashtami all over the country. In the Dahi Handi competition, small children who are Bal Gopal take part in the competition. The buttermilk filled with buttermilk etc. is hung on a high peak and the program is organized to break the ball by the children. The winner who breaks the team mood is entitled to the reward.

Janmashtami fast

There has been a legislation in India for years to observe fast on the day of Shri Krishna Janmashtami. According to its strength, all people resort to fruit and cigarettes. No god does this to starve us. Therefore, according to your merit and reverence fasting should be done. If you do not eat anything during the fast for the whole day, you can have a bad effect on your health. Therefore we should try to adopt the messages of Lord Shri Krishna in our life.

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